बुवि : बुंदेलखंड के साहित्य में इतिहास बोध पर शोध परियोजना स्वीकृत

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बुंदेलखंड के साहित्य में इतिहास बोध : वास्तविकता और कल्पना विषय पर भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद की ओर से शोध परियोजना स्वीकृत की गई है। परियोजना के लिए 03 लाख रुपये की अग्रिम ग्रांट भी स्वीकृत की गई है। शोध कार्य की प्रगति एवं गुणवत्ता के आधार पर आगामी चरणों में ग्रांट की राशि बढ़ाए जाने की संभावना है।

इस महत्वपूर्ण शोध परियोजना का दायित्व प्रो. मुन्ना तिवारी को सौंपा गया है।

प्रो. तिवारी पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोधपीठ के निदेशक, इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमैनिटीज एंड एप्लाइड सोशल साइंसेज के समन्वयक तथा हिंदी विभाग के आचार्य हैं।

परियोजना के अंतर्गत बुंदेलखंड के साहित्य में इतिहास बोध, ऐतिहासिक घटनाओं एवं पात्रों के साहित्यिक पुनर्सृजन तथा वास्तविकता और कल्पना के अंतर्संबंधों का शोधपरक अध्ययन किया जाएगा। इसके माध्यम से बुंदेलखंड की समृद्ध साहित्यिक एवं ऐतिहासिक विरासत को नए अकादमिक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास होगा।

कुलपति प्रोफेसर मुकेश पांडेय ने शोध परियोजना की स्वीकृति पर प्रो. मुन्ना तिवारी को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की साहित्यिक और ऐतिहासिक विरासत पर केंद्रित इस प्रकार के शोध कार्य न केवल अकादमिक जगत को नई दिशा देते हैं, बल्कि बुंदेलखंड की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर सामने लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

प्रोफेसर मुन्ना तिवारी ने कहा कि इस शोध परियोजना से बुंदेलखंड के साहित्य और इतिहास के अंतर्संबंधों पर नए शोध आयाम विकसित होने के साथ-साथ क्षेत्र की साहित्यिक-सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, अध्ययन और दस्तावेजीकरण को बढ़ावा मिलेगा।