कांकेर, 29 अगस्त । छत्तीसगढ ़के कांकेर जिले के छोटेबेठिया थाना इलाके के ग्राम मोरखंडी में सुरक्षा बलों की टीम एरिया डोमिनेशन एवं सर्चिंग अभियान पर निकली थी। इस दाैरान सुरक्षा बलों ने आज शनिवार काे नक्सली डंप का खुलासा किया। नक्सल डंप से बरामद सामानों को जब बाहर निकाला गया तो जवान भी हैरान रह गए। डंप से भरमार बंदूकें एवं नक्सली सामग्री सहित दुर्लभ वन्य जीव पैंगोलिन को मारकर निकाली गई उसकी शल्क 3 किलो 500 ग्राम बरामद किया गया हैं।
नक्सली डंप से बहुत कम ऐसा देखने को मिला है कि किसी वन्य जीव के शल्क मिले हों। कांकेर में शायद यह पहला मौका है, जब जवानों ने सर्चिंग के दौरान नक्सल डंप के साथ पैंगोलिन के शल्क बरामद किए हैं। जवानों ने पैंगोलिन शल्क मिलने की सूचना वन विभाग को दी है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि आखिर नक्सलियों के पास पैंगोलिन के शल्क कैसे पहुंचे और उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था।
कांकेर पुलिस अधीक्षक निखिली राखेचा ने बताया कि छोटेबेठिया पुलिस, डीआरजी और बीएसएफ की टीम रुटीन सर्चिंग अभियान पर कांकेर के मोरखंडी जंगल में एरिया डोमिनेशन के लिए गई थी। सर्चिंग के दौरान जवानों को मोरखंडी नदी के किनारे कुछ गड़े होने की खबर मिली। जवानों ने तत्काल इलाके की घेराबंदी कर सघन सर्चिंग अभियान चलाया। खुदाई के दौरान जवानों को जमीन के नीछे छिपाकर रखे गए हथियार और पैंगोलिन शल्क मिले। पैंगोलिन शल्क को एक टिफिन बॉक्स में बंद कर रखा गया था। जवानों ने मौके से भरमार बंदूकें और नक्सली सामग्री बरामद किया है।
पखांजूर के एडिशनल एसपी राकेश कुर्रे का कहना है कि दुर्लभ वन्य जीव पैंगोलिन के शल्क की बरामदगी के पीछे नक्सलियाें के द्वारा वन्यजीव तस्करी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। स्थानीय स्तर पर इसके इस्तेमाल से लेकर बाहरी या अंतरराष्ट्रीय बाजार में तस्करी तक, पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। पूर्व में भी नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कीमती लकड़ियों और अन्य वन संपदाओं की तस्करी के मामले सामने आते रहे हैं। ऐसे में पैंगोलिन के शल्क की बरामदगी को गंभीरता से लिया जा रहा है।
वन विभाग के अनुसार भारतीय पैंगोलिन एक अत्यंत दुर्लभ स्तनधारी प्रजाति है, यह कीटों और दीमकों को खाकर पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। अपनी लंबी और चिपचिपी जुबान से ये कीड़ों को आसानी से पकड़ने में माहिर है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके शल्कों और मांस की अवैध मांग के कारण यह प्रजाति गंभीर संकट में भी है। किसी भी वन्यजीव को पकड़ना, रखना, बेचने का प्रयास करना या नुकसान पहुंचाना कानूनन गंभीर अपराध है, जिसके लिए कठोर दंड का प्रावधान है।