पूर्व शिक्षिका को 20 लाख रुपए क्षतिपूर्ति देने के निर्देश

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जयपुर, 20 अगस्त । राजस्थान हाईकोर्ट ने गैर सरकारी शैक्षणिक संस्थान अधिकारी के 16 अप्रैल, 2024 को दिए आदेश को संशोधित करते हुए अजमेर की माहेश्वरी पब्लिक स्कूल प्रबंध समिति को निर्देश दिए हैं कि वह याचिकाकर्ता पूर्व शिक्षिका को क्षतिपूर्ति के तौर पर एक मुश्त बीस लाख रुपए का भुगतान करे। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि दो माह बाद भी स्कूल प्रबंध समिति यह राशि देने में असफल रहती है तो इस आदेश की तिथि से 9 फीसदी ब्याज भी देना होगा। जस्टिस अनुरूप सिंघी की एकलपीठ ने यह आदेश रानी गुप्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।

याचिका में अधिवक्ता सुनील समदडिया ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता माहेश्वरी स्कूल में शिक्षिका के तौर पर साल 1995 में नियुक्त हुई थी। वहीं साल 1998 में उसे हिंदी विषय की व्याख्याता के तौर पर पदोन्नत कर जुलाई, 2000 में इस पद पर स्थायी किया गया। इसके बाद 28 जनवरी, 2015 को प्रबंध समिति ने उसकी सेवाएं यह कहते हुए समाप्त करने का निर्णय लिया कि स्कूल में हिंदी विषय का कोई छात्र नहीं है। इसकी पालना में मई, 2015 को उसकी सेवा समाप्त कर दी गई। इसके आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ता ने अधिकरण में अपील दायर की। अधिकरण ने सेवा समाप्ति के आदेश को गलत मानते हुए कहा कि वह सेवानिवृत्ति की आयु पूरी कर चुकी है और सेवा समाप्ति के बाद उसने कोई सेवा नहीं दी है, ऐसे में उसे एक लाख रुपए का मुआवजा दिलाया जाता है। इसे चुनौती देते हुए कहा गया कि अधिकरण ने सेवा समाप्ति को गलत माना है तो उसे समस्त वेतन व परिलाभ दिलाने चाहिए थे। ऐसा आदेश न देना स्कूल प्रशासन को अपनी स्वयं की गलती का लाभ उठाने की अनुमति देने के समान है। सेवा समाप्ति के समय उसका मासिक वेतन करीब पचास हजार रुपए था। ऐसे में एक लाख रुपए का मुआवजा उचित नहीं है। जिसका विरोध करते हुए प्रबंध समिति की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता ने सेवा समाप्ति के बाद कोई काम नहीं किया। ऐसे में एक लाख रुपए का मुआवजा उचित है। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने मुआवजा राशि को बढ़ाकर बीस लाख रुपए करने के आदेश दिए हैं।