कोरबा, 08 अगस्त (हि. स.)। कोरबा जिले में वन्यजीवों की आबादी वाले क्षेत्रों में दस्तक लगातार लोगों के लिए चिंता का कारण बन रही है। शनिवार सुबह कोरबा से करीब 16 किलोमीटर दूर तरदा गांव में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक ग्रामीण के घर के पास करीब साढ़े चार फीट लंबा मगरमच्छ दिखाई दिया।
मगरमच्छ को देखते ही ग्रामीणों में कुछ देर के लिए दहशत का माहौल बन गया। हालांकि वन विभाग और आरसीआरएस रेस्क्यू टीम की तत्परता से मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़ लिया गया और उसे जांजगीर-चांपा जिले के कोटमीसोनार स्थित मगरमच्छ संरक्षण आरक्षित क्षेत्र भेज दिया गया।
जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह करीब 6 बजे तरदा निवासी ग्रामीण थिरत राम मांझी ने अपने घर के पास एक जीव को देखा। शुरुआत में दूर से देखने पर उन्हें लगा कि वहां कोई अजगर हो सकता है। लेकिन जब उन्होंने ध्यान से देखा तो सामने करीब 4.5 फीट लंबा मगरमच्छ मौजूद था। घर के पास मगरमच्छ दिखाई देने की जानकारी मिलते ही ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गई। इसके बाद तत्काल वन विभाग को इसकी सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, वनमंडल कोरबा की टीम सक्रिय हो गई। वनमंडलाधिकारी प्रेमलता यादव के निर्देश और उपवनमंडलाधिकारी सूर्यकांत सोनी के मार्गदर्शन में वन विभाग की टीम के साथ आरसीआरएस रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। टीम ने सबसे पहले आसपास के क्षेत्र को सुरक्षित किया, ताकि मगरमच्छ के कारण ग्रामीणों को किसी तरह का खतरा न हो।
रेस्क्यू अभियान के दौरान करतला रेंजर अक्ष पलक ऋषि, परिसर रक्षक कपिल कंवर संडैल, परिसर रक्षक दीपक कुजूर महोरा, वनपाल के.पी. सिदार, सर्प मित्र जितेंद्र सारथी, आरसीआरएस अध्यक्ष अविनाश यादव सहित रेस्क्यू टीम के सदस्य मानस मौके पर मौजूद रहे। टीम ने काफी सतर्कता और सूझबूझ के साथ मगरमच्छ को नियंत्रित करने की कार्रवाई शुरू की। लंबे प्रयास के बाद मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़ लिया गया।
मगरमच्छ के रेस्क्यू के बाद वन विभाग की टीम ने आवश्यक पंचनामा कार्रवाई पूरी की। इसके बाद उसे सुरक्षित वाहन से जांजगीर-चांपा वनमंडल के कोटमीसोनार स्थित मगरमच्छ संरक्षण आरक्षित क्षेत्र भेज दिया गया। इस दौरान वन विभाग और रेस्क्यू टीम ने ग्रामीणों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा।
वन विभाग ने ग्रामीणों और आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी वन्यजीव के आबादी वाले क्षेत्र में दिखाई देने पर घबराएं नहीं और उसे पकड़ने, भगाने या उसके करीब जाने का प्रयास न करें। वन्यजीव की सूचना तत्काल वन विभाग को दें, ताकि प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंचकर सुरक्षित तरीके से कार्रवाई कर सके। वन्यजीवों के संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए नागरिकों की सतर्कता और सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है।