जबलपुर, 23 जुलाई । मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के सिहोरा क्षेत्र के जंगल से लगे चौथई गांव में पिछले चार माह से तेंदुए की लगातार सक्रियता ग्रामीणों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। मवेशियों पर हमलों और आबादी के करीब तेंदुए के पहुंचने की घटनाओं के बाद ग्रामीणों में भय का माहौल है। उनका कहना है कि कई बार सूचना देने के बावजूद अब तक वन विभाग की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।
बरगी पंचायत के अंतर्गत धनगवां वन परिक्षेत्र की बीट में स्थित आदिवासी बहुल चौथई गांव घने जंगलों से घिरा है। ग्रामीणों के अनुसार तेंदुए की मौजूदगी के कारण शाम ढलते ही लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं और खेतों में आने-जाने में भी सतर्कता बरत रहे हैं।
ग्रामीण गुमान सिंह और मंगो बाई ने बताया कि उनका मकान गांव से कुछ दूरी पर खेत में स्थित है। देर रात एक तेंदुआ उनके घर के पास पहुंच गया और पालतू कुत्ते को पकड़कर ले जाने का प्रयास किया। परिवार के सदस्यों के शोर मचाने पर तेंदुआ कुत्ते को छोड़कर जंगल की ओर भाग गया।
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले तीन-चार महीनों में तेंदुआ कई छोटे मवेशियों का शिकार कर चुका है। बसोर सिंह की गाय के बछड़े, पर्वत सिंह के बछड़े सहित अन्य पशुओं पर भी हमले की घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं की जानकारी वन विभाग के बीट प्रभारी और ग्राम पंचायत को दी गई, लेकिन अब तक न तो कोई रेस्क्यू अभियान चलाया गया और न ही क्षेत्र में निगरानी या गश्त बढ़ाई गई।
ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते तेंदुए की निगरानी और आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में जनहानि की घटना भी हो सकती है। उन्होंने वन विभाग से क्षेत्र में लगातार गश्त, निगरानी और आवश्यक होने पर तेंदुए को पकड़ने की कार्रवाई करने की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार वर्ष की शुरुआत में समीपवर्ती गौरहा बीट क्षेत्र में भी तेंदुए की गतिविधियां देखी गई थीं। वहीं गौरहा के जंगल में एक तेंदुआ घायल अवस्था में मृत मिला था। गौरहा और चौथई गांव के बीच करीब तीन किलोमीटर की दूरी है तथा दोनों क्षेत्रों के बीच जंगल और खेतों के रास्ते होने से वन्यजीवों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में ग्रामीण चौथई क्षेत्र में तेंदुए की बढ़ती सक्रियता को गंभीरता से देख रहे हैं।