नई दिल्ली, 03 जुलाई । सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार की ओर से बिजली वितरण कंपनियों के सीएजी ऑडिट के आदेश पर रोक लगा दी है। जस्टिस केवी विश्वनाथन की अध्यक्षता वाली वेकेशन बेंच ने यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया।
याचिका दिल्ली विद्युत नियामक आयोग ने दायर की है। याचिका में ऑडिटर नियुक्त करने के दिल्ली सरकार के आदेश को चुनौती दी गई है।
दिल्ली सरकार ने 2 जुलाई को सीएजी आडिट करने का आदेश दिया था। इसके तहत सीएजी को उन हालातों की सख्त और गहन जांच करनी थी, जिनकी वजह से बिजली वितरण कंपनियां रेगुलेटरी एसेट्स की वसूली किए बिना काम करती रहीं। जिन तीन कंपनियों का ऑडिट होना था, वे हैं बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड, बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड।
रेगुलेटरी एसेट्स का मतलब वह पैसा जो बिजली कंपनियों ने पहले ही खर्च कर दिया है लेकिन उसे अभी तक उपभोक्ताओं से बिल के जरिए वसूला नहीं गया है। यह रकम धीरे-धीरे हर साल जुड़ती जाती है और आगे चलकर उपभोक्ताओं के बिजली बिल में जोड़ी जाती है। दिल्ली में यह रकम अब 38,500 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। दिल्ली सरकार के मुताबिक इतनी बड़ी रकम के जमा होने के पीछे की वजहों की जांच जरूरी है इसीलिए सीएजी ऑडिट का आदेश दिया गया था।