जयपुर, 02 मई । साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन जयपुर ने अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 17 आरोपिताें को गिरफ्तार किया है। आरोपिताें ने व्हाट्सऐप पर कंपनी के चेयरमैन की फोटो और नाम का इस्तेमाल कर अकाउंटेंट को झांसे में लिया और 5 करोड़ 30 लाख रुपये विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए।
मामले में परिवादी दीपेन्द्र सिंह ने 24 अप्रैल 2026 को साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई थी। उसने बताया कि वह गैलेक्सी माइनिंग कंपनी में अकाउंटेंट है। उसे कंपनी मालिक के नाम और फोटो वाले दूसरे व्हाट्सऐप नंबर से मैसेज मिला, जिसमें दो अलग-अलग बैंक खातों में तत्काल भुगतान करने के निर्देश दिए गए। भरोसा कर उसने 5.30 करोड़ रुपए ट्रांसफर कर दिए, बाद में यह साइबर ठगी निकली।
साइबर क्राइम पुलिस मुख्यालय के उप महानिरीक्षक शांतनु कुमार सिंह ने बताया कि पुलिस अधीक्षक सुमित मेहरड़ा के निर्देशन में गठित विशेष टीमों ने बैंक खातों का तकनीकी विश्लेषण किया। जांच में सामने आया कि ठगी की रकम कई खातों में घुमाई गई और बाद में नकद निकासी के साथ यूएसडीटी और हवाला के जरिए ठिकाने लगाई गई।
पुलिस ने कोटा ग्रामीण, पाली, बांसवाड़ा, जोधपुर और बाड़मेर जिला पुलिस के सहयोग से कार्रवाई करते हुए 17 आरोपिताेें को गिरफ्तार किया। इनमें बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले, नकद निकासी करने वाले, कमीशन एजेंट और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए राशि ट्रांसफर करने वाले शामिल हैं। गिरफ्तार आरोपियों में सोहेल खान, मोहम्मद राशीद, समीर, तोहिद मोहम्मद, नवीन सिंह चौहान, अविनाश जैन, प्रवीण रावल, अमित रावल, भव्य गिरी, मुकेश चौहान, घनश्याम धतरवाल, राहुल उर्फ आरडीएक्स, कमलेश, दिपेन्द्र सिंह, वीरेन्द्र, हरीश और सदराम शामिल हैं।
जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य बैंक खाते, पासबुक, चेकबुक और डेबिट कार्ड उपलब्ध कराते थे। आरोपित चाय की थड़ियों या सार्वजनिक स्थानों पर मिलकर नकद लेन-देन और कमीशन का बंटवारा करते थे ताकि किसी को शक न हो।
मूलतः गुजरात निवासी तोहिद मोहम्मद ने कोटा में रहकर वकालत की पढ़ाई के साथ-साथ हेयर सैलून संचालकों के बैंक खाते खुलवाए और ठगी की राशि निकलवाकर आगे पहुंचाई। सोहेल खान, मोहम्मद राशीद और समीर सैलून में काम करते थे और अपने खातों में रकम मंगवाकर 3 से 6 हजार रुपये कमीशन पर नकद निकालते थे।
ऑटो पार्ट्स कारोबारी नवीन सिंह चौहान ठगी की राशि से ऐप के जरिए यूएसडीटी खरीदता था, जिससे पैसे का ट्रैक छिपाया जा सके। अमित रावल ने ई-मित्र केंद्र के माध्यम से अपने परिजनों के खाते 5 हजार रुपये प्रति खाते के हिसाब से उपलब्ध कराए।
भव्य गिरी, अविनाश जैन और मुकेश चौहान नकद निकासी और रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का काम करते थे। वहीं घनश्याम धतरवाल परिचितों के खाते खुलवाकर उनमें राशि जमा करवाता और बाद में नकद निकालकर यूएसडीटी में बदलता था।
दिपेन्द्र सिंह और वीरेन्द्र ने अपने परिचितों के खाते लालच देकर गिरोह को उपलब्ध कराए। राहुल उर्फ आरडीएक्स, कमलेश, हरीश और सदराम ने अपने नाम से खाते खुलवाकर 5 हजार रुपए प्रति खाते कमीशन लिया।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपित 3 हजार से 50 हजार रुपए तक कमीशन लेकर खाते उपलब्ध कराते थे और कुछ आरोपित ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर लेन-देन छिपाने का काम करते थे।
इस कार्रवाई में साइबर क्राइम थाना प्रभारी पुलिस उपाधीक्षक सुगन सिंह के नेतृत्व में जयपुर, पाली, जोधपुर, कोटा ग्रामीण, बांसवाड़ा और बाड़मेर पुलिस की संयुक्त टीमों ने तकनीकी विश्लेषण और फील्ड इंटेलिजेंस के आधार पर पूरे नेटवर्क को ट्रैक कर गिरफ्तारियां कीं।
साइबर क्राइम शाखा ने आमजन से अपील की है कि किसी भी व्हाट्सऐप संदेश, कॉल या वित्तीय निर्देश की पुष्टि किए बिना बड़ी राशि ट्रांसफर न करें। ठगी की स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।