पूरी नहीं हुई तो फिर से बड़ी महापंचायत करके बड़े आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी।
शहर के क्रांतिमान पार्क में साेमवार काे हुई महापंचायत
में मांग की गई कि जीजेयू प्रशासन द्वारा सस्पेंड किए गए सभी छात्रों को तुरंत बहाल
किया जाए, हिसार व कुरुक्षेत्र में छात्रों पर दर्ज मुकदमो को वापस लिया जाए, विश्वविद्यालय
परिसर में सभी छात्र संगठनों को अपने कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी जाए। इसके
अलावा, प्रदेश में शिक्षा शुल्क को नियंत्रित करने के लिए ‘फीस रेगुलेटरी बोर्ड’ के गठन,
छात्रों के लिए एक्टिविटी सेंटर की स्थापना और मेस में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता
की जांच कराने तथा छात्र संघ चुनाव की मांग जोरशोर से उठाई गई। इसके अलावा पुलिस और
छात्रों के बीच हुए विवाद की निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी गठित करने की मांग भी की
गई। महापंचायत में प्रदेश की विभिन्न खापों से पहुंचे प्रतिनिधियों ने विभिन्न विषयों
पर अपनी बात रखी।
युवा जजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिग्विजय
चौटाला ने महापंचायत में तीन सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 16 तारीख को गमले तोड़ने के
मामले में छात्रों पर मुकदमे दर्ज किए गए और रात दो बजे दबिश देकर बर्बरता की गई। अगले
दिन प्रदर्शन में शामिल सभी छात्रों को रेस्टीकेट कर दिया गया। क्या यूनिवर्सिटी केवल
आरएसएस, एबीवीपी, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल या गीता जयंती जैसे कार्यक्रमों के लिए
ही है?
पूरा बिहार दुष्यंत के साथ : पप्पू
यादव
महापंचायत में पहुंचे बिहार के पूर्णिया
से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने कहा कि हरियाणा की आवाज सदन में उठाई जाएगी। उन्होंने
कहा कि अजय चौटाला मेरा सगा भाई है। अलग-अलग कोख से जन्म लिया है, यह बात अलग है। इस
संघर्ष में पूरा बिहार और देश इस महापंचायत और दुष्यंत के साथ खड़ा है।
एक ही विचारधारा पर चल रहा विश्वविद्यालय
पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला
ने आरोप लगाया कि जीजेयू में आरएसएस व भाजपा की विचारधारा का प्रचार किया जा रहा है।
अन्य छात्रों या संगठनों को यहां कार्यक्रम करनेे की इजाजत नहीं है। उन्होंने महापंचायत
में उन छात्रों व पार्टी नेताओं से रूबरू करवाया, जिनको पुलिस ने उठाया था या जीजेयू
ने निष्किासित किया है। ऐसा कहते हुए दुष्यंत ने उनके लिए न्याय की मांग की।
12 दिन पहले शुरू हुआ था विवाद
दरअसल गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय
में 16 अप्रैल को जजपा व इनसो की ओर से किए गए उग्र प्रदर्शन के बाद विवाद शुरू हुआ
था। कार्यक्रम की अनुमति न मिलने पर दिग्विजय चौटाला की अध्यक्षता में जजपा ने कुलपति
कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान तोड़फोड़ के आरोप में दिग्विजय चौटाला समेत
8 नेताओं व अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया, जिनमें से 6 नेताओं को गिरफ्तार भी किया गया
था। हालांकि, उन्हें अगले दिन जमानत मिल गई। जजपा नेताओं पर केस दर्ज होने के बाद
17 अप्रैल को दुष्यंत चौटाला गिरफ्तारी देने जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में उनका
सीआईए इंचार्ज पवन कुमार से विवाद हो गया। दुष्यंत ने आरोप लगाया कि पवन कुमार ने उनका
काफिला रोककर धमकाया, जबकि पवन कुमार का कहना था कि दुष्यंत के काफिले में चल रही एस्कॉर्ट
गाड़ी का ड्राइवर लापरवाही से वाहन चला रहा था, इसलिए उसे रोककर समझाया गया।