चिट्टा तस्करी में अंबाला से एक और आरोपी गिरफ्तार, 10 लाख रुपये के लेन-देन के सुराग

Share

शिमला, 15 अप्रैल । हिमाचल प्रदेश में चिट्टा तस्करी के एक संगठित नेटवर्क के खिलाफ चल रही जांच के दौरान शिमला पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। इस मामले में पुलिस ने बैकवर्ड लिंक जोड़ते हुए हरियाणा के अंबाला से एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी नेटवर्क में धन उपलब्ध कराने और लेन-देन के समन्वय की भूमिका निभा रहा था।

यह मामला 22 अगस्त 2025 को थाना रामपुर बुशहर में दर्ज एफआईआर नंबर 80/2025 से जुड़ा है। उस दिन पुलिस ने किन्नौर जिले के सांगला क्षेत्र के रहने वाले तीन आरोपियों प्रशांत नेगी (27 वर्ष), अविनाश ठाकुर (35 वर्ष) और देवन जोश (28 वर्ष) को 17.150 ग्राम चिट्टा (हेरोइन) के साथ गिरफ्तार किया था। इसके बाद से पुलिस लगातार इस मामले में नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में लगी हुई थी।

जांच के दौरान तकनीकी विश्लेषण और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल के आधार पर पुलिस ने आरोपी करण (34 वर्ष), निवासी खड़क मंगोली, पुराना पंचकूला और वर्तमान निवासी इमर्जिंग हाइट्स सोसायटी, जीरकपुर को 13 अप्रैल को अंबाला से गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार आरोपी का इस मामले के अन्य सह-अभियुक्तों, विशेष रूप से एक मुख्य सह-अभियुक्त के साथ सीधा संपर्क था। जांच में दोनों के बीच करीब 10 लाख रुपये के लेन-देन के साक्ष्य भी सामने आए हैं।

पुलिस का कहना है कि आरोपी ड्रग तस्करी नेटवर्क में धन उपलब्ध कराने, लेन-देन कराने और आपसी संपर्क बनाए रखने की भूमिका में सक्रिय था। इसी आधार पर उसकी संलिप्तता एनडीपीएस एक्ट की धारा 29 (षड्यंत्र और साझेदारी) के तहत स्थापित की गई है।

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी पहले से ही मादक पदार्थ तस्करी के मामलों में शामिल रहा है। उसके खिलाफ थाना सेक्टर-20 पंचकूला, थाना पिंजौर और थाना चंडीमंदिर में भी एनडीपीएस एक्ट के तहत मामले दर्ज हैं।

गिरफ्तारी के बाद आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 16 अप्रैल तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।

इस मामले में अब तक कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इससे पहले किन्नौर और रामपुर क्षेत्र से राजदीप, कृष्ण कुमार, इवान, हिमांशु नेगी और परविंदर नेगी को भी गिरफ्तार किया गया था।

एसएसपी शिमला गौरव सिंह का कहना है कि इस संगठित ड्रग नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान के लिए जांच जारी है। पुलिस का लक्ष्य केवल सीमित कार्रवाई तक नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म करना है।