मंगलवार को बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर की जयंती पर प्रधानमंत्री मोदी ने जिस दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का लोकार्पण किया, उसमे कुछ खास खूबी हैं। आइये जानते हैं इस कॉरिडोर की कुछ खास बातें।
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर लगभग 213 किलोमीटर लंबा है। छह लेन वाला दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर लगभग 12 हजार करोड़ की लागत से तैयार किया गया है। इसके शुरू होने के बाद दिल्ली से देहरादून की यात्रा का समय छह घंटे से घटकर मात्र ढाई घंटे रह जाएगा, जिससे यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
इसमें दस इंटरचेंज, तीन रेलवे ओवर ब्रिज, चार बड़े पुल और बारह वे-साइड सुविधाएं हैं। साथ ही इसमें एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम भी लगाया गया है।
वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए इसमें 12 किलोमीटर लंबा वाइल्डलाइफ एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया गया है। जिसे एशिया के सबसे लंबे वाइल्डलाइफ एलिवेटेड कॉरिडोर में गिना जा रहा है। इसके अलावा 8 एनिमल पास, 200-200 मीटर के दो हाथी अंडरपास और सहारनपुर बॉर्डर पर स्थित मॉ डाट काली मंदिर के पास पहाड़ों को काटकर 370 मीटर लंबी टनल भी बनाई गई है।
कॉरिडोर का यह हिस्सा बहुत ही सुंदर है। यह चारों ओर से जंगल और पहाडियों से घिरा हुआ है। इस हिस्से को पहाडों के बीच से गुजरती बरसाती नदी मे पीलर खडा करके तैयार किया गया, जिससे पेड़ नही काटने पड़े और पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखा गया।
इकोनॉमिक कॉरिडोर को चार सेक्शनो में बांटा गया है
सेक्शन 1
अक्षरधाम से यूपी बॉर्डर तक
लंबाई लगभग 31 किमी
6 लेन और 6 लेन सर्विस रोड
जिससे उत्तर-पूर्व दिल्ली को डी-कन्जेस्ट करने में मदद मिलेगी और जिसका ज्यादातर हिस्सा एलिवेटेड है।
सेक्शन-2
यूपी का ग्रीनफील्ड हिस्सा
यह पूरी तरह नया रास्ता है(लम्बाई लगभग 120 किमी)
बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर होकर सहारनपुर के लाखनौर तक इसे 6 लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड बनाया जा रहा है।
सेक्शन-3
सहारनपुर बाईपास पर लाखनौर से से गणेशपुर तक (लम्बाई लगभग 42 किमी)
इस सेक्सन मे पहले से बने 4-लेन हाइवे को एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे में बदला गया।
सेक्शन-4
गणेशपुर से देहरादून तक (Forest Zone) लंबाई लगभग 20 किमी
इसके अन्तर्गत 12 किमी का एशिया का सबसे बड़ा वाइल्डलाइफ एलिवेटेड कॉरिडोर है।
डाट काली मंदिर के पास 340 मीटर लंबी टनल बनाई गई है।
इस हिस्से को पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।