शराबंदी कानून की विफलता का परिणाम है जहरीली शराब से निरीह लोगो की मौत: डाॅ. अखिलेश सिंह

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पूर्वी चंपारण,09 अप्रैल । जिले के तुरकौलिया में जहरीली शराब से हुई मौत पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य डाॅ. अखिलेश प्रसाद सिंह ने सरकार पर बड़ा प्रहार किया है। उन्होने मौत के लिए सीधे तौर पर सरकार सहित संबंधित अधिकारियों को दोषी बताया है। जहरीली शराब से हुई मौत पर संवेदना व्यक्त करते हुए सरकार से पीड़ित परिवार को दस लाख रूपये मुआवजा देने की मांग की है। वे गुरूवार को स्थानीय परिसदन में पत्रकारो को संबोधित कर रहे थे।

उन्होने कहा कि सरकारी रिकाॅर्ड में दस लोगों की मौत दर्ज है, परन्तु जब हम पीड़ित परिवारों से बुधवार की शाम में मिले तो पता चला की काफी संख्या में लोगों की मौते हुई है। इनमें तुरकौलिया, हरसिद्धि सहित अरेराज, पहाड़पुर तक के लोग शामिल है। लोग भय के कारण मौत की जानकारी देने के बदले आनन-फानन में शव को जला दिए।

उन्हाेंने कहा कि अबतक एनडीए के कोई भी नेता पीड़ित परिवारों से मिलकर उनकी आंसू पोंछने तक नहीं गये है। पीने वाले लोग को अगर हम दोषी मान भी लेते है तो पीड़ित परिवार को कैसे दोषी मानेंगे। जहरीली शराब की बड़ी-बड़ी खेप बिहार में पहुंचाई जा रही है। इस तरह के शराब का सेवन मजदूर किस्म के गरीब तबके के लोग कर रहे है। नेता, अधिकारियों के गठजोड़ के बिना शराब की खेप नहीं आ रही है। इस धंधे में बड़े-बड़े रसूक वाले लगे है। जो सरकार के लोगों से मिलीभगत कर तस्कारी के कार्य में जुटे हुए है। शराबबंदी के दस वर्ष गुजर गये। दस वर्षो में हजारो लोगों की जान चली गई, आंखो की रौशनी चली गई, परन्तु सरकार इस नीति की समीक्षा करना मुनासिब नहीं समझी।

उन्होने कहा कि शुक्रवार को कांग्रेस के लोग राज्यपाल से मिलकर इस कानून की समीक्षा की मांग करेंगे। साथ ही मोतिहारी जहरीली शराब कांड की न्यायिक जांच की मांग करेगे। वहीं पीड़ित परिवारो को मुआवजे सहित नीति में बदलाव की भी मांग की जायेगी। कांग्रेस के लोग गरीबो की मौत को मजाक नहीं बनने देंगे, सदन से लेकर सड़क तक इसकी लड़ाई लड़ी जायेगी। बिहार जैसे गरीब राज्य को प्रतिवर्ष 30 हजार करोड़ की राजस्व का नुकसान हो रहा है। शराब की खेप को रोक पाने में संबंधित विभाग सहित प्रशासनिक अमला पूरी तरह से फेल है। बिहार में अपराध एवं भ्रष्टाचार चरम पर है। अपराधी बेलगाम है, हत्या, लूट, बलात्कार, जैसी घटनाओं में काफी हिजाफा हुआ है। सरकार इस मामले में कुछ भी सफाई देने की स्थिति में नहीं है। राज्य सरकार का खजाना चुनाव के पूर्व ही खाली कर दिया गया। यहां के लोग पलायन कर दुसरे राज्यों में मजदूरी करने जा रहे है, लेकिन मजदूरो को रोकने के लिए कोई विजन नहीं है।