दंड प्रणाम करते हुए 1700 किमी की कठिन यात्रा पर निकले दो युवक, विश्व कल्याण की कामना

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पूर्णिया, 08 अप्रैल । असम के प्रसिद्ध शक्तिपीठ कामाख्या मंदिर से एक अद्भुत और प्रेरणादायक यात्रा की शुरुआत हुई है। प्रांजल मंडल अपने सहयोगी मंगलदास के साथ करीब 1700 किलोमीटर की लंबी यात्रा पर निकले हैं, जिसका लक्ष्य काशी विश्वनाथ मंदिर होते हुए केदारनाथ मंदिर धाम तक पहुंचना है।

इस कठिन यात्रा की सबसे खास बात यह है कि प्रांजल मंडल “दंड प्रणाम” करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। कामाख्या से पूर्णिया पहुंचने में ही उन्हें लगभग 246 दिन, यानी करीब 8 महीने का समय लग गया।

दोनों यात्रियों के साथ एक साइकिल है, जिस पर उनके दैनिक उपयोग का सामान रखा हुआ है। साइकिल पर तिरंगा झंडा, बजरंगबली और बाबा भोलेनाथ के ध्वज लगे हुए हैं। भगवा वस्त्र धारण किए ये दोनों युवक पूरे रास्ते लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।

प्रांजल मंडल अपने साथ अपने माता-पिता की तस्वीर भी रखे हुए हैं। उनका कहना है कि “माता-पिता ने मुझे जन्म दिया है, इसलिए मैंने उनके नाम पर यह कठिन यात्रा करने का संकल्प लिया है।” उनका उद्देश्य केवल अपनी आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि वे बाबा भोलेनाथ से प्रार्थना कर रहे हैं कि पूरे भारत और विश्व का कल्याण हो, समाज में भाईचारा बढ़े और लोगों के बीच प्रेम बना रहे।

इसी क्रम में पूर्णिया पहुंचने पर श्री राम सेवा संघ के संस्थापक राणा प्रताप सिंह, संरक्षक नंदकिशोर सिंह एवं वरिष्ठ सदस्य उज्जवल कुमार और सोनी कुमार द्वारा यात्रियों का स्वागत किया गया। इस दौरान उन्हें नया बेड फोम और नकद राशि प्रदान की गई। साथ ही भविष्य में किसी भी प्रकार की सहायता के लिए मोबाइल नंबर साझा कर हरसंभव सहयोग का आश्वासन भी दिया गया।