पलामू, 02 अप्रैल । जिला स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक गुरूवार को समाहरणालय भवन के सभागार में गुरूवार को आयोजित की गयी।
बैठक में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की उपस्थिति में उपायुक्त समीरा एस, उपविकास आयुक्त जावेद हुसैना के अलावा जिले के विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधि, अग्रणी जिला प्रबंधक (एलडीएम) एवं विभागीय पदाधिकारी शामिल हुए।
बैठक में साख जमा अनुपात (सीडी रेसियो), कृषि ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी), एसीपी, पीएमइजीपी, एनआरएलएम, एनयूएलएम और अन्य सरकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गयी।
मौके पर वित्त मंत्री ने कहा कि पलामू आर्थिक-सामाजिक दृष्टिकोण से अत्यंत पिछड़ा हुआ जिला है। पलामू क्षेत्र की अर्थव्यवस्था बहुत की कमजोर है। किसानों, बेरोजगार नौजवानों और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में बैंकों की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण है।
बैंकर्स की समीक्षा के क्रम में उनकी भागीदारी को लेकर वित्त मंत्री ने गंभीर चिंता व्यक्त की और बैंकर्स को सामाजिक और प्राथमिक प्रक्षेत्र में त्वरित सुधार लाने को कहा।
वित्त मंत्री ने उपायुक्त, से कहा कि जिन बैंकों का प्रदर्शन खराब है उन बैंकों में सरकारी धन राशि नहीं रखा जाए।
पलामू के सभी बैंकों में 31 दिसंबर 2025 तक कुल 10,345 करोड़ 95 लाख रूपये जमा थे। इसके विरूद्ध मात्र 4,213 करोड़ 66 लाख रूपये (40.73 प्रतिशत) ही ऋण अग्रिम दिया गया है। मंत्री ने इस पर नाराजगी जाहित करते हुए कहा कि जून 2025 में पलामू का सीडी रेसियो 41.21 प्रतिशत था जो 06 माह में 0.48 प्रतिशत की गिरावट हो गयी। इसके कारण सीडी रेसियो 41.21 प्रतिशत से घटकर 40.73 प्रतिशत हो गया। वित्त मंत्री ने कहा कि देश का औसत सीडी रेसियो (ऋण, जमा अनुपात) 80 प्रतिशत है।
वहीं झारखंड का 53.63 प्रतिशत है, जबकि पलामू का सीडी रेसियो मात्र 40.73 प्रतिशत है, जो पलामू के बैंकों की शिथिलता को दर्शाता है।
कृषि क्षेत्र की समीक्षा में अत्यंत चिंताजनक स्थिति सामने आई। वितीय वर्ष 2025-26 के 09 माह बीत जाने के बावजूद भी कुल उपलब्धि मात्र 30.14 प्रतिशत रही, जबकि दिसंबर तिमाही में प्रगति केवल 6.9 प्रतिशत दर्ज की गई। साथ ही कृषि ऋण लाभुकों की संख्या 39000 से घटकर 35,260 रह जाना गंभीर चिंता का विषय पाया गया।
इस दौरान वित्त मंत्री ने अधिक से अधिक किसानों को केसीसी देने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया।
बैठक में सरकारी योजनाओं के अंतर्गत बढते एनपीए पर भी चिंता व्यक्त की गई। विशेष रूप से पीएमइजीपी में 26.94 प्रतिशत एनपीए दर्ज किया गया, जिस पर नियंत्रण के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया गया।
वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकर्स को केवल ऋण वितरण ही नहीं, बल्कि उसकी गुणवता और पूरा भुगतान पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा।