मप्र के विदिशा जिले के गौमय उत्पादों को स्कॉच अवॉर्ड, 2150 महिलाओं की मेहनत को मिला सम्मान

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विदिशा, 30 मार्च । मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के लिए यह गर्व का क्षण है कि जिले में निर्मित गौमय उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। नई दिल्ली में गत दिवस आयोजित स्कॉच समिट 2026 के दौरान विदिशा की गौशालाओं से जुड़े उत्पादकों को प्रतिष्ठित स्कॉच अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। विदिशा कलेक्टर अंशुल गुप्ता को नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में विदिशा जिले को प्राप्त अवार्ड सम्मान प्रमाण पत्र को सौंपा गया है।

गौरतलब है कि कलेक्टर प्रतिनिधि के रूप में जिला पंचायत सीईओ ओपी सनोडिया और पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग के उप संचालक एनके शुक्ला ने दिल्ली में उक्त अवार्ड प्रमाण पत्र को प्राप्त किया था, जिसे सोमवार को कलेक्टर चेम्बर में उल्लेखित अधिकारियों के द्वारा सौंपा गया।

कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने बताया कि दीपावली 2025 से पहले एक व्यापक अभियान चलाया गया। इसके अंतर्गत विदिशा जिले की 45 गौशालाओं एवं आजीविका मिशन से जुड़ी 182 महिला स्व-सहायता समूहों की लगभग 2150 महिलाओं को गौमय उत्पाद निर्माण से जोड़ा गया है। इस पहल के तहत महिलाओं ने गोबर से बने करीब 250 प्रकार के पर्यावरण अनुकूल उत्पाद तैयार किए, जिनमें दीपक, हवन कप, धूपबत्ती, मूर्तियां और सजावटी सामग्री प्रमुख हैं। उत्पादन को गति देने के लिए 108 हस्तचालित मशीनें और बड़ी संख्या में सांचे उपलब्ध कराए गए, जिससे बड़े पैमाने पर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार किए जा सके। परिणामस्वरूप लगभग 25 लाख गौमय दीपकों का निर्माण किया गया, जिन्हें देश के विभिन्न शहरों में भेजकर बिक्री की गई। इस पूरी प्रक्रिया से उत्पादकों को करीब 12.50 लाख रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हुई, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली।

विशेष पहलू

प्लास्टिक और रासायनिक उत्पादों के स्थान पर प्राकृतिक एवं जैविक गौमय उत्पादों का उपयोग बढ़ा।, 2150 ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और आय का स्थायी स्रोत मिला। गौशालाओं को अतिरिक्त आय के स्रोत प्राप्त हुए, जिससे उनका संचालन सुदृढ़ हुआ। विदिशा के उत्पाद देशभर में पहुंचे, जिससे ब्रांड पहचान बनी। यह पहल पशुपालन, आजीविका और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ते हुए एक टिकाऊ ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मॉडल प्रस्तुत करती है। इस अभिनव मॉडल की सफलता के बाद इसे और व्यापक स्तर पर लागू करने की योजना बनाई जा रही है। भविष्य में अधिक गौशालाओं और स्व-सहायता समूहों को जोड़कर उत्पादन बढ़ाने तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने पर जोर दिया जाएगा। कलेक्टर के नवाचारों का यह प्रयास दिखाता है कि स्थानीय संसाधनों और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से किस तरह आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक विकास को एक साथ आगे बढ़ाया जा सकता है।