काठमांडू, 26 मार्च । पूर्व न्यायाधीश गौरी बहादुर कार्की की अध्यक्षता में गठित जांच आयोग ने राष्ट्रीय सुरक्षा निगरानी को लेकर सरकार को महत्वपूर्ण सिफारिशें की हैं। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में सरकार को काठमांडू सहित देशभर में संचालित मस्जिद, मदरसों, बौद्ध गुम्बा और चर्चों की निगरानी बढ़ाने की सलाह दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि विभिन्न क्षेत्रों में बने बड़े और गुम्बा पर प्रभावी निगरानी की जानी चाहिए।
काठमांडू में पिछले साल 8 और 9 सितंबर को हुए जेन जी विरोध प्रदर्शन से जुड़ी हिंसक घटनाओं की जांच के लिए यह आयोग बनाया गया था। जांच आयोग ने अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की को सौंपी रिपोर्ट में मुस्लिम बच्चों की शिक्षा से जुड़े मदरसों के वित्तीय स्रोतों और गतिविधियों की नियमित निगरानी करने तथा ईसाई समुदाय से जुड़े चर्चों की गतिविधियों पर भी नजर रखने की सिफारिश की गई है। आयोग का कहना है कि इन संस्थानों की गतिविधियां संभावित रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं और राज्य को अपनी खुफिया क्षमता को तुरंत मजबूत करना चाहिए।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि तिब्बती ओरिजिनल ब्लड (टीओबी) समूह से जुड़े मोटरसाइकिल सवार युवाओं की गतिविधियां 8 सितंबर को न्यू बानेश्वर स्थित संसद भवन के पास हुई घटना के दौरान तनाव को और भड़काने में सक्रिय दिखीं। आयोग के अनुसार इस समूह की गतिविधियों को लेकर न केवल नेपाल में, बल्कि पड़ोसी देश चीन में भी चिंता व्यक्त की गई। नेपाल आधिकारिक रूप से ‘एक चीन नीति’ का पालन करता है और रिपोर्ट में कहा गया है कि तिब्बती शरणार्थी भी खुले तौर पर विरोध प्रदर्शन में शामिल देखे गए।
आयोग ने चेतावनी दी है कि यदि नेपाल की भूमि का उपयोग पड़ोसी देशों के खिलाफ गतिविधियों के लिए किया गया, तो इससे देश को कूटनीतिक रूप से कठिन स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, रिपोर्ट में ८ और ९ सितंबर की घटनाओं में टीओबी समूह की संलिप्तता का उल्लेख किया गया है, लेकिन इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश नहीं की गई है। इसके बजाय, सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर अधिक सतर्क रहने की सलाह दी गई है।