जयपुर, 25 मार्च । राजस्थान में औद्योगिक विकास को नई गति देने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने औद्योगिक पार्क प्रोत्साहन नीति-2026 लागू की है। इस नीति का उद्देश्य प्रदेश में विश्वस्तरीय औद्योगिक पार्क विकसित कर बेहतर निवेश वातावरण तैयार करना और रोजगार के अवसर बढ़ाना है।
सरकार द्वारा अब तक 34 से अधिक औद्योगिक नीतियां लागू की जा चुकी हैं, जिससे ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, अनुमोदन प्रक्रिया के सरलीकरण और पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से प्रदेश का औद्योगिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है।
नई नीति के तहत निजी क्षेत्र में औद्योगिक पार्कों का विकास चार अलग-अलग मॉडल ए, बी, सी और ड पर किया जाएगा। मॉडल-ए में रीको द्वारा आवंटित भूमि पर निजी डेवलपर द्वारा विकास, मॉडल-बी में 80% भूमि डेवलपर और 20% रीको द्वारा, मॉडल-सी में संपूर्ण भूमि डेवलपर द्वारा उपलब्ध और मॉडल-डी में पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल होगा।
इन पार्कों के लिए न्यूनतम 50 एकड़ क्षेत्र और कम से कम 10 औद्योगिक इकाइयों की स्थापना अनिवार्य होगी।
नीति में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है। कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) पर होने वाले खर्च का 50 प्रतिशत (अधिकतम 12.5 करोड़ रुपये प्रति पार्क) तक प्रतिपूर्ति का प्रावधान किया गया है। साथ ही पहले 10 औद्योगिक पार्क डेवलपर्स को 20 प्रतिशत पूंजीगत अनुदान भी दिया जाएगा, जिसकी अधिकतम सीमा 40 करोड़ रुपये तक निर्धारित की गई है।
औद्योगिक पार्कों तक सड़क, जल और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। संपर्क मार्गों के निर्माण में 60 प्रतिशत खर्च राज्य सरकार और 40 प्रतिशत डेवलपर द्वारा वहन किया जाएगा, जिसमें सरकार का अधिकतम योगदान तीन करोड़ रुपये तक होगा।
नीति के तहत राज निवेश पोर्टल के माध्यम से सिंगल विंडो क्लीयरेंस की सुविधा दी जाएगी, जिससे आवेदनों का समयबद्ध निस्तारण संभव होगा।
इसके अलावा कैप्टिव नवीकरणीय ऊर्जा पर 7 वर्षों तक 100% विद्युत शुल्क छूट, स्टाम्प शुल्क व कन्वर्जन शुल्क में 25% छूट और प्लग-एंड-प्ले ऑफिस कॉम्प्लेक्स के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन भी दिए जाएंगे।
यह नीति नरेन्द्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ विजन के अनुरूप है। इसके माध्यम से प्रदेश में निवेश को बढ़ावा मिलेगा, औद्योगिक गतिविधियां तेज होंगी और बड़े स्तर पर रोजगार सृजन के अवसर पैदा होंगे।
राज्य सरकार का मानना है कि इस नीति से राजस्थान देश-विदेश में एक भरोसेमंद और भविष्य के लिए तैयार औद्योगिक गंतव्य (इंडस्ट्रियल डेस्टिनेशन) के रूप में स्थापित होगा।