गुरुग्राम दुष्कर्म मामले की लचर जांच पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी, एसआईटी गठित

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नई दिल्ली, 25 मार्च । उच्चतम न्यायालय ने गुरुग्राम की चार साल की नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म मामले की लचर जांच पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने बच्ची के बयान को दरकिनार कर मामले को कमजोर करने पर गुरुग्राम के चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) के सदस्यों को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न उन्हें उनके पद से हटा दिया जाए। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने तीन सदस्यीय एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) का गठन किया है।

कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि पुलिस कमिश्नर से लेकर सब-इंस्पेक्टर तक पूरा पुलिस अमला आरोपितों को बचाने में लगा रहा। कोर्ट ने पहले बच्ची के यौन उत्पीड़न की रिपोर्ट देने के बाद रुख बदलने वाली मैक्स अस्पताल की डॉक्टर को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया है। उच्चतम न्यायालय ने इस मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की है, जिसमें तीन महिला आईपीएस अधिकारियों कला रामचंद्रन, नाजनीन भसीन और अंशु सिंगला को शामिल किया गया है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत अपराध के प्रमाण प्रथम दृष्टया मौजूद था। फिर भी पुलिस ने सिर्फ धारा 10 के तहत मामला दर्ज किया, क्योंकि इस धारा में कम गंभीर अपराध आते हैं। ये साफ है कि पुलिस ने आरोपित को बचाने की हरसंभव कोशिश की। कोर्ट ने 23 मार्च को इस मामले की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या एसआईटी से जांच की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए हरियाणा सरकार और राज्य के डीजीपी को नोटिस जारी किया था। उच्चतम न्यायालय ने गुरुग्राम के डिस्ट्रिक्ट जज को निर्देश दिया कि वो संबंधित मजिस्ट्रेट से पूछे कि इतने संवेदनशील मामले की जांच में इतना लचर रवैया क्यों अपनाया गया।

मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष मेंशन करते हुए 20 मार्च को वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा था कि ये काफी डरावना मामला है। नाबालिग को मजिस्ट्रेट के सामने भेजा गया। अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं की गई है। घटनास्थल को भी संरक्षित नहीं किया गया है। सीसीटीवी फुटेज भी नहीं लिए गए हैं। नाबालिग ने सबकुछ बताया है लेकिन हुआ कुछ नहीं। गुरुग्राम पुलिस ने कुछ नहीं किया। इसमें घरेलू सहायिका लिप्त है। तब मुख्य न्यायाधीश ने कहा था कि आप उच्च न्यायालय क्यों नहीं गए। उच्च न्यायालय काफी काम कर रही है। तब रोहगती ने कहा था कि उच्च न्यायालय चंडीगढ़ में है। लड़की के पिता गुरुग्राम में हैं। सबसे बड़ी अदालत से मैसेज जाना चाहिए।