लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक अधिकृत महिंद्रा वर्कशॉप, नारायण ऑटोमोबाइल्स, से लापरवाही का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने ऑटोमोबाइल सेक्टर में ग्राहकों की सुरक्षा और भरोसे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ग्राहक अपनी नई स्कॉर्पियो-एन (UP 16 DV 2217) की मामूली ब्रेक पैड मरम्मत कराने पहुंचे थे, लेकिन वर्कशॉप की गलती ने उस साफ़-सुथरी गाड़ी को ‘एक्सीडेंटल’ बना दिया।
मामूली काम के लिए गए थे, गाड़ी का ढांचा ही बदल दिया
घटना शनिवार, 7 मार्च 2026 की है। पीड़िता, श्रीमती सेतु तालियान ने बताया कि उन्हें अगले दिन लखनऊ से नोएडा की यात्रा करनी थी, इसलिए वे अपनी गाड़ी के ब्रेक पैड बदलवाने के लिए नारायण ऑटोमोबाइल्स ले गईं। वहां ब्रेक पैड बदलने का काम पूरा होने के बाद, वर्कशॉप के मैकेनिक ने गाड़ी को सावधानी से बाहर निकालने के बजाय, उसे बेहद तेज रफ्तार में सामने वाली लिफ्ट की दीवार से भिड़ा दिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि गाड़ी का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया और गाड़ी का मुख्य ढांचा यानी चेसिस (Chassis) भी मुड़ गया।
बिना अनुमति के गाड़ी पर वेल्डिंग और कटाई
पीड़िता का आरोप है कि वर्कशॉप ने इस बड़ी दुर्घटना को छुपाने और रफा-दफा करने के लिए उनकी अनुपस्थिति में गाड़ी के बॉडी और चेसिस के हिस्सों को काट दिया और उन पर वेल्डिंग कर दी। यह सब ग्राहक की सहमति या जानकारी के बिना किया गया। जब अगले दिन श्रीमती सेतु ने अपनी गाड़ी की हालत देखी, तो वे दंग रह गईं। जिस गाड़ी को उन्होंने एक छोटे से काम के लिए सौंपा था, उसे वर्कशॉप की लापरवाही ने कबाड़ में तब्दील कर दिया था।


CCTV फुटेज छिपाने का आरोप और जबरन ‘चुप’ कराने की कोशिश
इस पूरे मामले में वर्कशॉप की पारदर्शिता भी संदिग्ध है। पीड़िता का कहना है कि वर्कशॉप प्रबंधन ने उन्हें घटना का वास्तविक CCTV फुटेज देने से साफ मना कर दिया है। यही नहीं, वर्कशॉप ने गाड़ी वापस करने से पहले ग्राहक पर एक सेटलमेंट एग्रीमेंट (Settlement Agreement) साइन करने का दबाव भी बनाया, जिसमें एक शर्त यह भी थी कि ग्राहक इस घटना का कोई भी वीडियो या जानकारी सोशल मीडिया पर साझा नहीं करेगा।
मुआवजे से इनकार: 7-8 लाख रुपये के नुकसान का कौन होगा जिम्मेदार?
गाड़ी के एक्सीडेंटल होने से उसकी रीसेल वैल्यू (Resale Value) और मजबूती पर बुरा असर पड़ा है। ग्राहक ने अनुमान लगाया है कि गाड़ी की कीमत में लगभग 7-8 लाख रुपये की गिरावट आई है, जिसका मुआवजा उन्होंने वर्कशॉप से माँगा है। हालांकि, वर्कशॉप के मालिक और प्रतिनिधियों ने मुआवजे से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने केवल वारंटी बढ़ाने और बीमा देने जैसे छोटे प्रस्ताव दिए हैं, जो गाड़ी के स्ट्रक्चरल नुकसान के सामने ऊंट के मुंह में जीरे के समान हैं।
महिंद्रा अधिकारियों का निराशाजनक रवैया
ग्राहक ने जब इस मामले को महिंद्रा के वरिष्ठ अधिकारियों और आनंद महिंद्रा के कार्यालय तक पहुँचाया, तो वहां से भी कोई ठोस मदद नहीं मिली। महिंद्रा के कस्टमर केयर मैनेजर, अमोल तिवारी ने ग्राहक से संपर्क तो किया, लेकिन उनका जवाब और भी चौंकाने वाला था। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि “एक बार गाड़ी बिक जाने के बाद, उसके साथ होने वाली किसी भी घटना के लिए कंपनी जिम्मेदार नहीं है।”
यह बयान बेहद गैर-जिम्मेदाराना है क्योंकि दुर्घटना ग्राहक के चलाने से नहीं, बल्कि महिंद्रा के अपने अधिकृत वर्कशॉप के कर्मचारी की लापरवाही से हुई है।
वर्तमान स्थिति और कानूनी कार्रवाई
श्रीमती सेतु ने इस मामले की लिखित शिकायत स्थानीय पुलिस और डीसीपी (DCP) को दी है। उन्होंने साफ किया है कि वे वर्कशॉप के किसी भी छोटे ऑफर को स्वीकार नहीं करेंगी और उन्हें उचित मुआवजा चाहिए, क्योंकि गाड़ी के मैन्युफैक्चरिंग स्ट्रक्चर के साथ हुई छेड़छाड़ उनकी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।
यह घटना उन हजारों कार मालिकों के लिए एक चेतावनी है जो अपनी मेहनत की कमाई से महंगी गाड़ियां खरीदते हैं और भरोसे के साथ उन्हें सर्विस सेंटर पर छोड़ते हैं। अब देखना यह है कि क्या महिंद्रा एंड महिंद्रा इस मामले में दखल देकर अपने ग्राहक को न्याय दिलाती है या ‘कस्टमर फर्स्ट’ का नारा सिर्फ विज्ञापनों तक ही सीमित रह जाता है।