काठमांडू, 23 मार्च । एक सप्ताह बाद यानी 27 मार्च को बालेन्द्र शाह को प्रधानमंत्री नियुक्त किया जाना तय हो चुका है। ऐसे में जेन जी आंदोलन की जांच प्रतिवेदन को लागू करना या सार्वजनिक करना अब उन्हीं की जिम्मेदारी होगी।
अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की की सरकार ने उक्त प्रतिवेदन को सार्वजनिक न करने का निर्णय लिया है। अंतरिम प्रधानमंत्री के प्रेस सलाहकार रामबहादुर रावल ने कहा कि वर्तमान सरकार अपने हिस्से का काम पूरा कर चुकी है। उन्होंने कहा, “इस सरकार ने प्रतिवेदन को आगे बढ़ा दिया है, बाकी काम आने वाली सरकार पूरा करेगी।” रविवार को हुई मंत्रिपरिषद बैठक ने जांच आयोग की रिपोर्ट को स्वीकार करने का निर्णय लिया था। हालांकि, रिपोर्ट स्वीकार करने के बाद भी आगे की कोई प्रक्रिया नहीं बढ़ाई गई है।
नेपाल सरकार के मुख्य सचिव सुमनराज अर्याल ने कहा, “प्रतिवेदन स्वीकार कर लिया गया है, इसके अलावा कुछ भी नहीं हुआ है। इसे सार्वजनिक करना है या नहीं, यह निर्णय कैबिनेट का होता है। जांच आयोग गठित कर रिपोर्ट सार्वजनिक करने और उसे लागू करने का वादा करने वाली सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली सरकार अब विदाई के चरण में है। इस सरकार ने रिपोर्ट के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी निर्वाचित सरकार को सौंप दी है।
रिपोर्ट स्वीकार करने के एक सप्ताह बाद भी न तो पूर्व घोषणा के अनुसार इसे सार्वजनिक किया गया है और न ही कार्यान्वयन के लिए संबंधित निकायों को भेजा गया है। फिलहाल रिपोर्ट प्रधानमंत्री कार्यालय में ही रखी हुई है। रिपोर्ट को सार्वजनिक करने और लागू करने की मांग जेन जी आंदोलन के नेताओं द्वारा लगातार की जा रही है। जेन जी की अगुवा रक्षा बम ने सुशीला कार्की से अपील की है कि वह रिपोर्ट सार्वजनिक करें और 8 और 9 सितंबर 2025 को हुई घटनाओं में संलिप्तता स्पष्ट करें।
सोशल मीडिया के माध्यम से उन्होंने कहा कि रिपोर्ट सार्वजनिक न होने से उन पर भी सवाल उठ रहे हैं, इसलिए इन प्रश्नों का जवाब देने के लिए रिपोर्ट को सार्वजनिक करना आवश्यक है।