‘ब्रह्मनाद’ में दशावतार का हाेगा मंचन, सनातन संस्कृति की दिखेगी झलक

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बीकानेर, 16 मार्च । हिंदू नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा की पूर्व संध्या पर शहर में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘ब्रह्मनाद संवत् 2083’ का आयोजन 18 मार्च को सायं 7 बजे से पुष्करणा स्टेडियम (पुष्करणा ग्राउंड) में किया जाएगा। इस वर्ष आयोजित ब्रह्मनाद कार्यक्रम में भगवान विष्णु के दशावतार का विशेष मंचन किया जाएगा, जिसके माध्यम से सनातन संस्कृति, भारतीय परंपरा और आध्यात्मिक विरासत की झलक प्रस्तुत की जाएगी। बीकानेर सांस्कृतिक मंच द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं और शहर में इसे लेकर उत्साह का वातावरण बना हुआ है।

कार्यक्रम को लेकर आज लाली माई पार्क स्थित वेद पाठशाला में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में डॉ. श्रीकांत व्यास ने विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर धनंजय व्यास, पंडित प्रह्लाद व्यास, आरती आचार्य और राजकुमारी व्यास भी उपस्थित रहे।

प्रेस वार्ता में बताया गया कि सनातन परंपरा के अनुसार सृष्टि की रचना ओंकार से हुई और उसी दिव्य ध्वनि को ब्रह्मनाद कहा जाता है। चैत्र प्रतिपदा को सृष्टि के आरंभ का प्रतीक माना जाता है और इसी कारण इसे भारतीय नववर्ष के रूप में मनाया जाता है। इस माह का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी विशेष माना गया है। इसी समय भगवान श्रीराम का जन्म हुआ तथा महाभारत काल में युधिष्ठिर का राज्याभिषेक भी इसी माह हुआ था। इसके साथ ही इस समय प्रकृति भी नए रूप में दिखाई देती है और वातावरण में नवचेतना का संचार होता है।

उन्होंने बताया कि ब्रह्मनाद कार्यक्रम की शुरुआत शंखनाद और सरस्वती वंदना से होगी। इसके बाद बीकानेर के युवा वेदपाठी पंडित राजेंद्र किराडू और पंडित प्रह्लाद व्यास के सान्निध्य में वेद मंत्रों का उच्चारण करेंगे। इस प्रस्तुति के माध्यम से पूरे वातावरण को आध्यात्मिक और भक्तिमय बनाया जाएगा।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण भगवान विष्णु के दशावतार पर आधारित विशेष नाट्य प्रस्तुति होगी, जिसमें मत्स्य, कूर्म, वराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, राम, कृष्ण, बुद्ध और कल्कि अवतारों की झलक मंचन के माध्यम से प्रस्तुत की जाएगी। इसके माध्यम से दर्शकों को सनातन धर्म की परंपराओं और आध्यात्मिक संदेश से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की श्रृंखला में बीकानेर के युवाओं का प्रसिद्ध ईशानाथ मंडल भजनों की प्रस्तुति देगा, वहीं श्री सखी ग्रुप शास्त्रीय संगीत के माध्यम से कार्यक्रम को और आकर्षक बनाएगा। इसके साथ ही कालबेलिया और कथक नृत्य की प्रस्तुतियां भी होंगी, जिनके माध्यम से भारतीय लोक और शास्त्रीय कला की सुंदर झलक देखने को मिलेगी।

आयोजन के दौरान संत समुदाय, भगवताचार्य, जनप्रतिनिधि और शहर के कई गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए शहरभर में व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों तक कार्यक्रम का संदेश पहुंचाया जा रहा है। इसके अलावा विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों में जनसंपर्क किया जा रहा है तथा रंगोली सजाकर और पीले चावल बांटकर नागरिकों को कार्यक्रम में आने का निमंत्रण दिया जा रहा है।

आयोजक समिति के अनुसार कार्यक्रम शाम 7 बजे प्रारंभ होकर रात लगभग 10 बजे तक चलेगा। समापन सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ और मां भगवती की महाआरती के साथ किया जाएगा। आयोजकों ने शहरवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस सांस्कृतिक आयोजन में सहभागी बनने का आह्वान किया है। प्रेस वार्ता के दौरान आयोजन से जुड़े पोस्टर का विमोचन भी किया गया।