बाइक टैक्सी संचालन के लिए गाइडलाइन बनाने को लेकर याचिका निस्तारित

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जयपुर, 16 मार्च । राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश में बाइक टैक्सी के संचालन के लिए नियम और गाइडलाइन बनाने से जुडे मामले में दायर जनहित याचिका को निस्तारित कर दिया है। अदालत ने कहा कि इस संबंध में साल 2025 में नियम बनाए जा चुके हैं। ऐसे में अब याचिका सारहीन हो गई है। जस्टिस पीएस भाटी और जस्टिस विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ ने यह आदेश जयपुर, महानगर तिपहिया वाहन चालक यूनियन की ओर से दायर जनहित याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए।

सुनवाई के दौरान पक्षकारों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरएन माथुर ने अदालत को बताया कि याचिका में बाइक टैक्सी संचालन के नियम व गाइडलाइन बनाने की गुहार की गई है। वहीं राज्य सरकार की ओर से राजस्थान मोटर व्हीकल्स एग्रीगेटर स्कीम, 2025 आ गई है। वरिष्ठ अधिवक्ता के तथ्य को रिकॉर्ड पर लेते हुए अदालत ने याचिका का निस्तारण कर दिया।

याचिका में अधिवक्ता अवि शर्मा ने अदालत को बताया की प्रदेश में हजारों की संख्या में बाइक का उपयोग टैक्सी के तौर पर पर किया जा रहा है। इसके बावजूद भी राज्य सरकार ने इनके संचालन के लिए कोई नियम और गाइड लाइन अब तक नहीं बनाई है, जबकि केन्द्र सरकार ने वर्ष 2020 में राज्यों को इस संबंध में गाइडलाइन बनाने को कहा था। याचिका में कहा गया की बाइक टैक्सी के रूप में कंपनियां निजी नंबर वाली बाइक को पंजीकृत कर उनका व्यावसायिक उपयोग करवा रही है। याचिका में कहा गया कि प्रदेश में पीली नंबर प्लेट लगे व्यावसायिक यात्री वाहन ही चलाने की अनुमति है। इसके बावजूद भी नियमों की अवहेलना कर आम निजी बाइक को बाइक टैक्सी के तौर पर संचालित किया जा रहा है। वहीं यदि इस बाइक टैक्सी से दुर्घटना हो जाए तो बीमा कंपनियां निजी वाहन का हवाला देकर क्लेम भी पास नहीं करेंगी। याचिकाकर्ता यूनियन के सदस्यों को पीली नंबर प्लेट लगे वाहन चलाने के लिए बाध्य किया जा रहा है और बाइक टैक्सी को इसके लिए छूट दी गई है। ऐसे में यह समानता के अधिकार के भी विपरीत है। याचिका में गुहार की गई है कि बाइक टैक्सी संचालन के लिए नियम और गाइडलाइन तैयार की जाए।