फतेहाबाद, 16 मार्च । जिले के किसानों की समस्याओं को लेकर आज अखिल भारतीय किसान सभा खाराखेड़ी का एक प्रतिनिधिमंडल जिला प्रधान विष्णुदत्त के नेतृत्व में उपायुक्त से मिला। किसानों ने अपनी ज्वलंत समस्याओं और लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर मुख्यमंत्री, हरियाणा सरकार के नाम एक मांग पत्र सौंपा। किसान सभा ने ज्ञापन के माध्यम से सरकार और बीमा कंपनियों पर गंभीर आरोप लगाए। किसानों ने सेम और अधिक बरसात के कारण हुए जलभराव से खराब फसलों, ढाणियों को हुए नुकसान का बीमा क्लेम व मुआवजा दिए जाने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को बताया कि फतेहाबाद जिले के लगभग दो दर्जन गांवों जैसे खाराखेड़ी, चिंदड़, भोड़ा होशनाक, बड़ोपल, कुम्हारिया से लेकर भट्टूकलां, जांडवाला बागड़ तक में वर्ष 2023 से लेकर 2025 तक का सेम और अधिक वर्षा के कारण हुआ बीमा क्लेम अभी तक बकाया है। किसानों का आरोप है कि बीमा कंपनियों ने प्रीमियम तो काट लिया, लेकिन नुकसान की भरपाई नहीं की। छुट-पुट जलभराव का मुआवजा किसानों को बरगलाना भरा है। सीएम ने 7 से 15 हजार रुपये प्रति किला मुआवजा व ढाणियों को नुकसान की भरपाई की घोषणा महज कौरी घोषणा ही साबित हुई है। किसानों ने आरोप लगाया कि बीमा कंपनियां सीएससी सेंटरों के माध्यम से कराई गई पॉलिसियों को बेवजह रिजेक्ट कर रही हैं। मांग की गई है कि इन रिजेक्टेड पॉलिसियों को तुरंत अप्रूव किया जाए और दोषी कंपनियों पर कानूनी कार्रवाई हो। सेम की ड्रेन को पक्का किया जाए और जो भूमि पिछले 8-10 वर्षों से खाली पड़ी है, उसके लिए 50 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए। ज्ञापन में बुढ़ापा पेंशन को बिना शर्त बहाल करने और गांवों में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है। वर्ष 2025 में कपास की फसल में 80 प्रतिशत से 95 प्रतिशत तक नुकसान हुआ था, लेकिन बीमा कंपनियां केवल 25 प्रतिशत नुकसान दिखाकर खानापूर्ति कर रही हैं। किसानों ने वास्तविक नुकसान के आधार पर पूर्ण मुआवजे की मांग की है। प्रतिनिधिमंडल में जिला प्रधान विष्णुदत्त के साथ मुख्य रूप से फकीर चंद, रमेश कुमार, धर्मपाल, रामकिशन, मुकेश, विष्णु, रामकुमार, संत लाल, मियाराम, पाला राम, सुशील कुमार, रामफल, राम सिंह, रामस्वरूप, प्रेम कुमार, घासीराम, संदीप, कुलदीप, दीपक कुमार, भजन लाल और संजय कुमार सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। किसानों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया, तो वे अपने आंदोलन को और तेज करने के लिए मजबूर होंगे।