देहरादून, 15 मार्च । उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम की आर से आयोजित षोडश संस्कार प्रयोगात्मक प्रशिक्षण कार्यशाला का रविवार को गरिमामय वातावरण में समापन हाे गया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि षोडश संस्कारों के प्रशिक्षण से समाज में सांस्कृतिक चेतना को बल मिलेगा।
उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि षोडश संस्कार केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं हैं,बल्कि ये व्यक्ति के जीवन को अनुशासित और संस्कारित बनाने का माध्यम हैं। इस प्रकार की प्रशिक्षण कार्यशालाएं समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक सिद्ध होंगी।
विशिष्ट अतिथि न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी ने कहा कि षोडश संस्कार भारतीय जीवन पद्धति की मूल आत्मा हैं और इनका उद्देश्य मनुष्य को जन्म से लेकर जीवन के विभिन्न चरणों में आध्यात्मिक, नैतिक और सामाजिक रूप से परिष्कृत करना है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से समाज में सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा मिलता है और भारतीय परंपराओं के संरक्षण को बल मिलता है।
संस्कृत शिक्षा विभाग के सचिव दीपक कुमार गैरोला ने कहा कि इस प्रकार की प्रयोगात्मक कार्यशालाएँ संस्कृत और भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने प्रशिक्षुओं से आह्वान किया कि वे प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान को समाज तक पहुँचाकर संस्कारों की परंपरा को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।
उन्होंने बताया कि संस्कृत शिक्षा विभाग के अंतर्गत उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम, विश्वविद्यालय और निदेशालय द्वारा संस्कृत शिक्षा के विकास के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें बालिकाओं के लिए गार्गी छात्रवृत्ति योजना,अनुसूचित जाति एवं जनजाति के विद्यार्थियों के लिए डॉ. भीमराव अंबेडकर छात्रवृत्ति योजना,संस्कृत विद्यालयों में गणित और विज्ञान विषयों की शुरुआत, प्रत्येक जिले में एक संस्कृत ग्राम की स्थापना और संस्कृत विषय से सिविल सेवा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क आईएएस कोचिंग जैसी पहलें शामिल हैं।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को उपनयन,वेदारंभ, चूड़ाकर्म, विद्यारंभ विवाह और समावर्तन जैसे विभिन्न संस्कारों का प्रयोगात्मक प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए और आयोजकों ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक सुभाष जोशी, सहसंयोजक एवं नोडल अधिकारी मनोज शर्मा, आचार्य विशाल मणि भट्ट, आचार्य पंकज, आचार्य अंकित बहुगुणा, महाकाल सेवा समिति के अध्यक्ष रोशन राणा, विनय प्रजापति, श्री गुरु राम राय लक्ष्मण संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. शैलेंद्र प्रसाद डंगवाल, डॉ.मनीष भंडारी,डॉ.मुकेश खंडूरी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।