टीआरआई में निदेशक स्टाफ तक नहीं, कैसे होगा आदिवासी कल्याण : रामेश्वर

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रांची, 13 मार्च । विधानसभा में बजट सत्र के दौरान शुक्रवार को कांग्रेस के विधायक रामेश्वर उरांव ने सदन की दूसरी पाली में आदिवासी मामलों से जनजातीय अनुसंधान संस्थान (टीआरआई) से जुड़े मुद्दे को उठाया। अनुसूचित जनजाति से संबंधित बजट प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि जहां आदिवासियों की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक स्थिति पर शोध किया जाता है, उस टीआरआई में पिछले एक वर्ष से न तो निदेशक है और न ही पर्याप्त संख्या में कर्मचारी उपलब्ध हैं। ऐसे में कैसे आदिवासी कल्याण होंगे इसे समझना होगा।

उन्होंने कहा कि नियमावली नहीं बनने के कारण संस्थान में नियुक्ति नहीं हो सकी है। यदि आदिवासी समाज पर शोध ही नहीं होगा तो उनके लिए प्रभावी नीतियां और योजनाएं कैसे बनाई जाएंगी।

डॉ उरांव ने कहा कि आदिवासियों की जनसंख्या में कमी के कारण उनके अधिकारों में भी कटौती की आशंका बढ़ रही है। इसलिए जनगणना की प्रक्रिया सही और पारदर्शी तरीके से हो, इसके लिए सरकार को पूरी तरह सतर्क रहने की जरूरत है।

उन्होंने कोचिंग संस्थानों में आदिवासी छात्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। साथ ही ट्राइबल सब प्लान की राशि का सही ढंग से उपयोग और उसका स्पष्ट लेखा-जोखा रखने की जरूरत बताई।

विधायक ने कहा कि राज्य में वन अधिकार अधिनियम, 2006 (एफआरए) का पूरा लाभ अभी तक नहीं मिल पा रहा है। सरकार को इस दिशा में गंभीरता से काम करते हुए इसे प्रभावी ढंग से लागू करना चाहिए, ताकि आदिवासी समुदाय को उनके अधिकारों का पूरा लाभ मिल सके।