छग विधानसभा : सदन में गृह मंत्री ने दी जानकारी पुलिस ने साल भर में सिर्फ किराए के वाहनों पर फूंके 130 करोड़ रुपये

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रायपुर, 12 मार्च ।छत्तीसगढ़ पुलिस ने महज़ साल भर में किराए के वाहनों पर 130 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। सरकारी एवं किराए के वाहनों पर डीजल-पेट्रोल के लिए 148 करोड़, मरम्मत पर 41 करोड़ तथा अन्य मदों पर 30 करोड़ रुपये का व्यय हुआ है। कुल मिलाकर यह खर्च लगभग 350 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। राज्य विधानसभा में गृहमंत्री विजय शर्मा द्वारा भाजपा विधायक राजेश मूणत के सवाल के लिखित जवाब में आज यह आंकड़े पेश किए गए हैं।

गृह विभाग की ओर से दिए गए जवाब में यह बताया गया है कि पुलिस विभाग के पास कुल 2618 हल्के वाहन, 720 मध्यम वाहन, 364 भारी वाहन और 6279 मोटरसाइकिल उपलब्ध हैं, जिनमें से कई पुराने एवं कंडम घोषित हो चुके हैं। आवश्यकता अनुसार जिला पुलिस इकाइयाँ वित्त विभाग के नियमों के तहत निजी वाहन किराए पर लेती हैं। सरकार ने विधानसभा में स्वीकार किया कि पिछले लगभग 30 महीनों (अप्रैल 2023 से जून 2025 तक) में पुलिस विभाग ने वाहनों के ईंधन पर कुल 300 से 350 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। विभाग द्वारा लगभग 66,000 निजी वाहन किराए पर लिए गए, जिनके डीजल पर ही अकेले 170 से 175 करोड़ रुपये खर्च हुए। विभाग के पास मौजूद 22,543 सरकारी वाहनों के ईंधन पर लगभग 130 करोड़ रुपये का खर्च आया। सदन में यह तथ्य भी सामने आया कि केवल वीआईपी कार्यक्रमों और सुरक्षा व्यवस्था के लिए किराए पर ली गई गाड़ियों पर 85 करोड़ रुपये से अधिक की राशि व्यय की गई।

दी गई जानकारी के अनुसार बस्तर संभाग में यहाँ किराए के वाहनों पर सर्वाधिक 71 करोड़ रुपये का डीजल खर्च दिखाया गया, जबकि सरकारी गाड़ियों पर यह खर्च 43 करोड़ रुपये था। राजनांदगांव में सरकारी गाड़ियों पर 5 करोड़ रुपये के मुकाबले किराए की गाड़ियों पर 16 करोड़ रुपये का तीन गुना अधिक खर्च हुआ।रायपुरमें राजधानी में सरकारी गाड़ियों के डीजल पर 18 करोड़ और किराए की गाड़ियों पर 25 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

विधानसभा में चर्चा के दौरान बताया गया कि वर्तमान में स्कॉर्पियो जैसे वाहनों का दैनिक किराया 2,000 रुपये है, जिसके ऊपर 12-14 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से अतिरिक्त भुगतान किया जाता है।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि जब पुलिस के पास अपनी नई गाड़ियां (डायल-112) मौजूद थीं, तो उन्हें दो साल तक कबाड़ में क्यों खड़ा रखा गया और निजी वेंडरों को लाभ पहुँचाने के लिए किराए की गाड़ियों पर 130 करोड़ रुपये से अधिक क्यों फूंके गए।पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और अन्य विपक्षी सदस्यों ने आज विशेष रूप से बस्तर संभाग में किराए की गाड़ियों पर हुए 71 करोड़ रुपये के ईंधन खर्च को “अस्पष्ट और संदेहास्पद” बताया।

गृह विभाग की ओर से जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि कई संवेदनशील क्षेत्रों में तत्काल संचालन के लिए और वीआईपी मूवमेंट के दौरान अतिरिक्त वाहनों की आवश्यकता के कारण ये गाड़ियाँ किराए पर ली गई थीं। उन्होंने अनियमितताओं की जांच कराने का आश्वासन भी दिया।

प्रश्नकाल के दौरान इस मुद्दे पर विपक्षी सदस्य “मंत्री के जवाब से असंतुष्ट” नजर आए और सदन में भारी नारेबाजी हुई, जिससे कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित भी हुई। विपक्ष ने आज सदन में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया कि 400 नई गाड़ियां पार्किंग में खड़ी रहीं, जबकि जनता के टैक्स का पैसा निजी गाड़ियों के किराए और अतिरिक्त डीजल पर खर्च किया गया।

हंगामे के बीच सरकार ने आश्वासन दिया है कि खर्च की इन विसंगतियों और “तेल के खेल” के आरोपों की विभागीय स्तर पर जांच कराई जाएगी।