अनुदान मांगों पर बहस में गरमाई विधानसभा: पानी, फसल बीमा और डॉ. किरोड़ी को लेकर तीखी टिप्पणियां

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जयपुर, 20 फरवरी । राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार काे कृषि और सहकारिता की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

पानी के मुद्दे से लेकर फसल बीमा और डॉ. किरोड़ीलाल मीणा को लेकर की गई टिप्पणियों पर सदन में हंगामे के हालात बन गए।

बसपा विधायक मनोज न्यांगली ने कहा कि सरकार ने हाल ही में घोषणा की थी कि पाकिस्तान जाने वाला पानी रोककर राजस्थान को दिया जाएगा। उन्होंने पूछा कि यह पानी कब और किस तरह प्रदेश के किसानों तक पहुंचेगा।

न्यांगली ने नदियों को जोड़ने के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के समय यह पहल की गई थी, लेकिन उसके बाद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने मांग की कि नदियों को जोड़कर राजस्थान के किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाया जाए।

उन्होंने फसल बीमा योजना को किसानों के लिए उपयोगी बताते हुए कहा कि इसका प्रीमियम सरकार वहन करे और इसे किसान सम्मान निधि से जोड़ते हुए स्वैच्छिक बनाया जाए।

कांग्रेस विधायक श्रवण कुमार ने कहा कि डिजिटल युग में भी रोटी गूगल से डाउनलोड नहीं हो सकती, वह किसान की मेहनत से ही पैदा होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को समय पर बीज और फसल का उचित दाम नहीं मिल रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं का प्राथमिकता से समाधान किया जाना चाहिए।

बहस के दौरान उपनेता प्रतिपक्ष रामकेश मीणा की मुख्यमंत्री को लेकर की गई टिप्पणी पर हंगामा हो गया। सभापति ने आपत्तिजनक टिप्पणी को कार्यवाही से निकालने के निर्देश दिए।

रामकेश मीणा ने डॉ. किरोड़ीलाल मीणा की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने भाजपा के लिए काफी काम किया, लेकिन उन्हें उनकी हैसियत के अनुरूप पद नहीं मिला। उन्होंने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री या गृहमंत्री बनाया जाना चाहिए था।

इस पर गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने तंज कसते हुए कहा कि कहीं डॉ. किरोड़ी गंगापुर से चुनाव न लड़ लें, इसलिए उनकी तारीफ की जा रही है। जवाब में रामकेश मीणा ने कहा कि डॉ. किरोड़ी उनके समाज के बड़े नेता हैं और यदि वे गंगापुर से चुनाव लड़ते हैं तो वे स्वयं सीट खाली करने को तैयार हैं।

रामकेश मीणा ने कहा कि पूर्वी राजस्थान में भाजपा को खड़ा करने में डॉ. किरोड़ी की बड़ी भूमिका रही है और उनके साथ न्याय नहीं हुआ। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि पार्टी को उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

बहस के दौरान हुई तीखी टिप्पणियों से सदन का माहौल गरमा गया, हालांकि बाद में कार्यवाही सामान्य रूप से आगे बढ़ी।