रांची, 20 फरवरी । विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान झारखंड लोक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के विधायक जयराम महतो ने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों पर महत्वपूर्ण मुद्दों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सदन में दोनों पक्षों की बातें सुनी गईं, लेकिन जिन जमीनी और मूल मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए थी, उन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
जयराम महतो ने कहा कि राज्य की सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था में इस तरह की स्थिति राज्यवासियों के बीच गलत संदेश देती है और इस पर सभी दलों को आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलन से जुड़े एक तिहाई आंदोलनकारी अब इस दुनिया में नहीं रहे, जबकि उनके परिजन आज भी राज्य गठन के मूल उद्देश्यों के बारे में जवाब की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
जेएलकेएम विधायक ने राज्य आंदोलनकारियों और जेल जाने वाले कार्यकर्ताओं के लिए निःशुल्क इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने 1932 खतियान, सरना धर्म कोड और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से जुड़े मुद्दों पर सरकार से ठोस पहल करने का आग्रह किया और कहा कि इन विषयों पर ठोस निर्णय राज्य के सामाजिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं।
इस दौरान राजमहल से विधायक एमटी राजा ने कहा कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली झारखंड मुक्ति मोर्चा सरकार ने पेसा कानून लागू कर महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य विधानसभा से पारित कई प्रस्ताव—जैसे 1932 खतियान, सरना धर्म कोड और ओबीसी से जुड़े विषय केंद्र सरकार को भेजे गए, लेकिन उन पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
एमटी राजा ने राज्य में शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील करते हुए प्रशासन से संवेदनशील तिथियों और रमजान के मद्देनजर सतर्क रहने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता बनाए रखना सरकार और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
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