धमतरी, 20 फ़रवरी । महिला एवं बाल विकास विभाग तथा संबंधित विभागों के संयुक्त तत्वावधान में अवैध व्यापार रोकथाम अधिनियम 1956 के प्रावधानों के तहत महिलाओं और बच्चों की तस्करी की रोकथाम एवं संरक्षण के उद्देश्य से लाइवलीहुड कॉलेज में शुक्रवार को एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों ने सहभागिता की।
प्रथम सत्र में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रतिनिधि ने अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम 1956, भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं तथा बाल संरक्षण कानूनों की विस्तृत जानकारी दी। बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी और मानव तस्करी से जुड़े अपराधों के कानूनी प्रावधानों एवं पुलिस की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। द्वितीय सत्र में साइबर अपराधों पर विशेष चर्चा हुई। पुलिस अधीक्षक सूरज सिंह परिहार ने बताया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और इंटरनेट मीडिया के माध्यम से अपराधी किस प्रकार लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं। साइबर ठगी से बचाव, सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार और हेल्पलाइन नंबर 1930 के माध्यम से त्वरित शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया की जानकारी भी दी गई।
इसके पश्चात बालकों के लैंगिक अपराधों से संरक्षण अधिनियम 2012 (पासको) के प्रावधानों, पुलिस की जिम्मेदारियों और बाल कल्याण समिति की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध एवं निवारण) अधिनियम 2013 के तहत आंतरिक शिकायत समिति के गठन एवं कार्यप्रणाली पर भी मार्गदर्शन प्रदान किया गया। साथ ही शासन द्वारा संचालित ‘शी बॉक्स पोर्टल’ के संबंध में जानकारी साझा की गई। कार्यक्रम में डिप्टी कलेक्टर कल्पना ध्रुव, कार्यक्रम अधिकारी जगरानी एक्का सहित पुलिस एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। समापन अवसर पर अधिकारियों ने प्रतिभागियों से समाज में जागरूकता बढ़ाने तथा महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।