नई दिल्ली, 19 फरवरी । केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को कहा कि मंत्रालय के सारे कार्यक्रम अब से पौधरोपण के साथ शुरू किए जाएंगे। कृषि विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोहों में पहले पेड़ लगाए जाएंगे और विद्यार्थियों से संकल्प दिलवाया जाएगा कि वे जीवनभर अपने जन्मदिन पर पौधा लगाएंगे।
केवीके, एग्रीकल्चर कॉलेज और रिसर्च से जुड़े किसी भी आयोजन में पेड़ लगाना शुरुआती अनिवार्य कदम होगा।
केंद्रीय मंत्री शिवराज गुरुवार को “एक पौधा प्रति दिन” संकल्प के पांच वर्ष पूर्ण होने पर पूसा स्थित एपी शिंदे हॉल में आयोजित विशेष कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर साध्वी ऋतंभरा और पर्यावरणविद् डॉ. अनिल जोशी, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट, साधना सिंह मौजूद रहे।
इस अवसर पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अमरकंटक में 19 फरवरी 2021 के दिन नर्मदा तट पर “रूद्राक्ष” और “साल” के पौधे रोपकर नर्मदा सेवा यात्रा के समापन पर मध्य प्रदेश में 6 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए, जिसने नदी, जंगल और जलवायु संरक्षण को जनआंदोलन में बदल दिया। इसी क्रम में “अंकुर अभियान” शुरू किया गया, जिसमें नागरिकों को पौधा लगाकर उसकी फोटो/सेल्फी पोर्टल पर अपलोड करने और उसकी रक्षा का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया गया। इस अभियान के माध्यम से लगभग 1 करोड़ पौधे लगाए गए।
उन्होंने सुझाव दिया कि एक राष्ट्रीय मंच बनाया जाए, जिसका नाम “संभावना” या “अंकुर” हो सकता है, जहां नागरिक जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ, बच्चों की वर्षगांठ, किसी प्रियजन की जयंती या पुण्यतिथि पर पौधा लगाने या लगवाने के लिए पंजीकरण कर सकें। महानगरों में रहने वाले लोग तय राशि (जैसे 100–150 रुपये) देकर अपने नाम से पेड़ लगवा सकें, और बदले में उन्हें उस पेड़ की फोटो और स्थान की जानकारी भेजी जाए। उन्होंने कहा कि देश में दानदाताओं की कोई कमी नहीं, कमी केवल काम करने वाले हाथों और व्यवस्थित मंच की है। यदि यह व्यवस्था खड़ी हो जाए तो “एक पौधा प्रति दिन” जैसे संकल्प एक महाअभियान में रूपांतरित हो सकते हैं।
साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि पौधरोपण धर्म, संस्कृति और धरती- तीनों की रक्षा का सच्चा यज्ञ है। पेड़ केवल हरियाली नहीं बल्कि धर्म, संस्कृति और धरती– तीनों की रक्षा का माध्यम हैं। पेड़ हमारे शास्त्रीय प्रतीकों, देववृक्षों और मातृभूमि की जीवंत अभिव्यक्ति हैं। जब कोई व्यक्ति या परिवार जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ, गृहप्रवेश या अन्य शुभ अवसरों पर पौधा लगाता है, तो वह केवल पेड़ नहीं, बल्कि पीढ़ियों के लिए पुण्य व संरक्षण का बीज भी बोता है। उन्होंने भावपूर्ण अपील की कि दिखावटी खर्च, आतिशबाजी और क्षणिक उत्सवों की बजाय लोग अपने शुभ अवसरों पर पौधारोपण को “सच्चा यज्ञ” मानें और हर पौधे की रक्षा को वैसा ही धर्म समझें जैसा हम मंदिर में दिए व्रतों का पालन करते हैं।