फरीदाबाद : नाबालिग का अपहरण कर हत्या मामले में आरोपी को दस साल की सजा

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फरीदाबाद, 18 फरवरी । नाबालिग लडक़ी को बहला फुसलाकर भगा ले जाने और उससे दो बच्चे होने के बाद उसकी हत्या करने के मामले में अदालत ने बुधवार को आरोपी को दस साल की सजा सुनाई है। आरोपी के खिलाफ हत्या का एक केस भी कोर्ट में विचाराधीन है। डिप्टी डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी सुरेश चौधरी ने बताया कि लडक़ी के पिता ने 7 मार्च 2017 को भूपानी थाने में शिकायत दी थी कि पप्पू नाम का एक युवक उसकी 15 साल की बेटी को भगा ले गया है। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज किया था। कुछ समय बाद लडक़ी के माता-पिता ने पप्पू को अपना लिया। वे उनके घर आने-जाने लगे। इसलिए पुलिस ने केस को आगे नहीं बढ़ाया, लेकिन केस थाने में ही दर्ज रहा। लडक़ी के दो बच्चे भी थे। एक बेटा और एक बेटी। उसने उससे भागने की कोशिश की और उसे बच्चों के साथ उसके पिता के घर छोड़ दिया। 12 अप्रैल, 2020 को वह अपने ससुराल लौटा और किशोरी को अपने साथ ले गया। वह उसे सेक्टर-17 बाईपास पर ले गया, जहाँ उसका सिर सीवर के मैनहोल के ढक्कन से टकराकर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। वह उसे वहीं बेहोश छोडक़र चला गया और उसके पिता को फोन पर बताया। किशोरी को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां बाद में उसकी मौत हो गई। इसके बाद बीपीटीपी थाने में पप्पू के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। इस बीच, भूपानी थाने में दर्ज किशोरी के अपहरण के मामले की भी जांच शुरू की गई। भूपानी थाने ने पप्पू को प्रोडक्शन वारंट पर लिया और मामले की आगे की जांच की। पहले दर्ज अपहरण के मामले में पोस्को एक्ट की धाराएं लगाई गईं और सबूत इक्कठा करना शुरू किया गया। पुलिस ने किशोरी का डीएनए उसके बच्चों और पप्पू के डीएनए से मैच कराने के लिए लैब भेजा। मैच कन्फर्म हो गया। इससे पुलिस कोर्ट में यह साबित कर पाई कि पप्पू ने नाबालिग के साथ शारीरिक संबंध बनाए थे। कोर्ट ने उसे दोषी पाया और सजा सुनाई। उसके खिलाफ हत्या के मामले की सुनवाई भी एक अलग कोर्ट में हो रही है। डिप्टी डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी सुरेश चौधरी ने बताया कि 2019 में पोस्को एक्ट में बदलाव किया गया था, जिससे कम से कम सज़ा 20 साल हो गई थी। पहले यह सज़ा 10 साल थी। चूंकि यह मामला 2019 से पहले का है, इसलिए कोर्ट ने आरोपी को 10 साल जेल की सज़ा सुनाई है।