शिमला, 18 फ़रवरी । हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने बुधवार को विपक्ष के भारी हंगामे के बीच केंद्र सरकार से राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बहाल करने का सरकारी संकल्प पारित कर दिया। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि आरडीजी हिमाचल का अधिकार है, कोई खैरात नहीं। उन्होंने घोषणा की कि उनकी पूरी कैबिनेट सभी प्रोटोकॉल तोड़कर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के नेतृत्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए तैयार है ताकि आरडीजी की बहाली सुनिश्चित की जा सके।
मुख्यमंत्री ने सदन में आरडीजी पर तीन दिनों से चल रही चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 275 और 280 के तहत यह अनुदान हिमाचल प्रदेश और यहां की जनता का हक है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक बार आरडीजी बंद हो गई तो इसे दोबारा बहाल कराना कठिन होगा और इसका सीधा असर प्रदेश के विकास कार्यों पर पड़ेगा।
मुख्यमंत्री ने पूर्व भाजपा सरकार पर वित्तीय संसाधनों के सही उपयोग न करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के समय प्रदेश को लगभग 54 हजार करोड़ रुपये आरडीजी और 16 हजार करोड़ रुपये जीएसटी मुआवजे के रूप में मिले, लेकिन इन संसाधनों का अपेक्षित लाभ प्रदेश को नहीं मिल सका। इसके विपरीत मौजूदा सरकार को आरडीजी के रूप में केवल 17 हजार करोड़ रुपये मिले हैं। उन्होंने कहा कि यदि पहले संसाधनों का सही उपयोग किया गया होता तो राज्य का कर्ज काफी कम किया जा सकता था।
सुक्खू ने यह भी कहा कि मौजूदा सरकार के सुधारों के कारण करीब 48 वर्षों बाद राज्य बिजली बोर्ड पिछले तीन वर्षों में लगभग 200 करोड़ रुपये के लाभ में आया है। उन्होंने हिमकेयर योजना को बंद करने के आरोपों को भी खारिज करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने अब तक इस योजना पर 927 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं, जबकि पूर्व सरकार ने अपने कार्यकाल में इस पर करीब 374 करोड़ रुपये ही खर्च किए थे। मुख्यमंत्री ने कुछ पनबिजली परियोजनाओं से जुड़े पुराने फैसलों की भी आलोचना की और कहा कि राज्य के हितों को मजबूत करने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री के जवाब के दौरान विपक्ष ने लगातार नारेबाजी और शोरगुल किया। नेता प्रतिपक्ष को भाषण के दौरान बोलने की अनुमति न मिलने पर विपक्षी सदस्य सदन के बीचोंबीच पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे, जिसके कारण कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित भी करनी पड़ी। बाद में कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी विपक्ष का विरोध जारी रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष उन्हें बाधित करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन सरकार आरडीजी की बहाली के मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगी।
अंत में विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने सदन की बैठक 18 मार्च सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।