कानपुर, 17 फरवरी । उत्तर प्रदेश के जनपद कानपुर के बिल्हौर की गंगा कटरी में स्थित जैसरमऊ वेटलैंड अब जिले की नई पर्यावरणीय पहचान बनने की ओर अग्रसर है। प्रदेश सरकार की ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन वेटलैंड’ योजना के तहत जैसरमऊ वेटलैंड का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। संरक्षण के साथ नियंत्रित विकास की कार्ययोजना तैयार की जा रही है, जिससे यह क्षेत्र प्रकृति पर्यटन और जैव-विविधता संरक्षण का केंद्र बन सके।
लगभग छह हेक्टेयर में फैला यह वेटलैंड गंगा की बाढ़ के जल से भरता है। वर्ष 2022 में अधिसूचना के बाद यहां आधारभूत सुधार कार्य किए गए थे। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह एवं प्रभागीय वन अधिकारी दिव्या ने संयुक्त रूप से मंगलवार को जायजा लेते हुए विकास कार्यों को गति देने के निर्देश दिए। वेटलैंड क्षेत्र की ड्रोन मैपिंग कराकर स्पष्ट सीमांकन किया जाएगा, जिससे अतिक्रमण पर प्रभावी रोक लग सके। क्रिटिकल गैप फंड से बर्ड टॉवर और वॉच टॉवर का निर्माण किया जाएगा। पैदल पाथ-वे बनाकर इसे बर्ड वॉचिंग और नेचर ट्रेल के रूप में विकसित करने की योजना है।
जैसरमऊ वेटलैंड जैव-विविधता से भरपूर है। यहां लिटिल कॉर्मोरेंट, पर्पल हेरॉन, ग्रेट एगरेट, ब्लैक-विंग्ड स्टिल्ट सहित अनेक दुर्लभ पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं। नीलगाय और गोल्डन सियार जैसे वन्यजीव भी देखे गए हैं। अब तक लगभग 150 प्रजातियों की पहचान हो चुकी है, जो इसे क्षेत्र का महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर बनाती है।
जिलाधिकारी ने गंगेश्वर आश्रम परिसर में पौधारोपण भी किया। महाशिवरात्रि पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन से यहां धार्मिक पर्यटन के साथ प्रकृति पर्यटन की संभावनाएं भी बन रही हैं। प्रशासन का लक्ष्य वैज्ञानिक संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता के जरिए जैसरमऊ वेटलैंड को मॉडल वेटलैंड के रूप में विकसित करना है। स्थानीय युवाओं को इको-टूरिज्म से जोड़कर रोजगार के अवसर भी सृजित किए जाएंगे, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।