जयपुर, 15 फ़रवरी । महाशिवरात्रि के अवसर पर जयपुर के विभिन्न क्षेत्रों कनकपुरा, मुरलीपुरा, देवधारा कॉलोनी, ग्राम बस्ती सहित अन्य स्थानों पर आयोजित विराट हिंदू सम्मेलनों में भव्य कलश यात्राओं, संतों के सान्निध्य,सामाजिक सम्मान समारोहों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच समाज की एकता, पारिवारिक व्यवस्था, गौ संरक्षण, पर्यावरण जागरूकता और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण का संदेश दिया गया।
कनकपुरा स्थित अमन बाग में आयोजित सम्मेलन का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ। विभिन्न मंदिरों से निकली कलश यात्रा में मातृशक्ति की उल्लेखनीय सहभागिता रही। प्रमुख वक्ता जसवंत खत्री, क्षेत्र कार्यवाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (राजस्थान) ने ‘पंच परिवर्तन’ का संदेश देते हुए जीवनशैली में सुधार, परिवार व्यवस्था को सुदृढ़ करने, गौ संरक्षण और सांस्कृतिक मूल्यों को व्यवहार में उतारने पर बल दिया। मुख्य अतिथि संत किशन महाराज तथा संत गोपाल शरण महाराज ने समाज को संगठित और जागरूक रहने का संदेश दिया। संयुक्त परिवार प्रणाली निभाने वाले परिवारों, देशी गाय पालन करने वालों तथा सामाजिक कार्यों में अग्रणी व्यक्तियों को सम्मानित किया गया।
मुरलीपुरा स्कीम में आयोजित सम्मेलन की शुरुआत भव्य कलश यात्रा से हुई। शिव महिमा, सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ और बालिकाओं के शौर्य प्रदर्शन ने आयोजन को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयाम प्रदान किया। मुख्य वक्ता श्याम सिंह ने कहा कि समाज की एकता, संस्कार और संगठन ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति हैं। कार्यक्रम में रामसेवक दास महाराज सहित संतों का सान्निध्य प्राप्त हुआ।
देवधारा कॉलोनी, विजयनगर अंतर्गत रामेश्वरधाम क्षेत्र में आयोजित सम्मेलन में भजन संध्या, शिव-पार्वती विवाह, भस्म आरती और फागोत्सव जैसे कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र रहे। मुख्य वक्ता अशोक कुमार शर्मा, पर्यावरण गतिविधि जयपुर प्रांत प्रमुख, ने पर्यावरण संरक्षण और धर्म के वैज्ञानिक महत्व को समझने की आवश्यकता पर बल दिया। आयोजन में महामंडलेश्वर नर्बदाशंकर, मनु महाराज और साध्वी गीतांजलि का सान्निध्य रहा।
ग्राम बस्ती में समस्त हिंदू समाज आयोजन समिति के तत्वावधान में आयोजित सम्मेलन में मातृशक्ति की कलश यात्रा के साथ कार्यक्रम आरंभ हुआ। विश्व हिन्दू परिषद जयपुर प्रांत के उपाध्यक्ष सुभद्र जी पापड़ीवाल, साध्वी तरुणा दीदी और डॉ. मीना मेनिवाल मंचासीन रहे। वक्ताओं ने सामाजिक समरसता, पारिवारिक मूल्यों और एकजुटता पर बल दिया। समाजसेवा में योगदान देने वाले व्यक्तियों और परिवारों का सम्मान किया गया।
विभिन्न स्थानों पर आयोजित इन सम्मेलनों का समापन सामूहिक आरती, संकल्प और प्रसादी वितरण के साथ हुआ, जिसमें समाज में एकता, सेवा और संस्कारों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया गया।