सुपौल, 15 फ़रवरी । जिले के त्रिवेणीगंज प्रखंड के डपरखा में रविवार को इमामों और उलेमाओं की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें समाज में फैली बुराइयों को खत्म करने, नशे से समाज को बचाने, तालीम को बढ़ावा देने तथा रमज़ान महीने की तैयारी और उसकी फज़ीलत को आम करने पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
बैठक की अध्यक्षता मुफ्ती जावेद अहमद रहमानी, शिक्षक जामिया रहमानी मुंगेर ने की, जबकि संचालन मोहम्मद अबुल महासिन ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत क़ुरआन-ए-पाक की तिलावत से हुई, जिसके बाद विभिन्न उलेमाओं ने अपने विचार रखे।
उलेमाओं ने कहा कि रमज़ान केवल रोज़ा रखने का महीना नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, सब्र, परहेज़गारी और अल्लाह से संबंध मजबूत करने का अवसर है। इस महीने में नेकी का सवाब कई गुना बढ़ा दिया जाता है, इसलिए हर मुसलमान को नमाज़, तिलावत, ज़िक्र और दुआ का विशेष एहतमाम करना चाहिए। इमामों से अपील की गई कि वे अपने जुमा के ख़ुत्बों और दैनिक बयानात में रोज़े की असली रूह को स्पष्ट करें।
बैठक में तरावीह की नमाज़ की बेहतर व्यवस्था, मस्जिदों की साफ-सफ़ाई, रोशनी और पानी की सुविधा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। युवाओं को मस्जिद से जोड़ने के लिए विशेष धार्मिक कार्यक्रम, दर्स-ए-क़ुरआन और इस्लाही बैठकों के आयोजन का सुझाव दिया गया। उलेमाओं ने शबे-क़द्र और एतिकाफ़ की अहमियत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रमज़ान का आख़िरी अशरा इबादत और इस्तिग़फ़ार के लिए खास तौर पर अहम है।ज़कात, सदक़ा-ए-फ़ित्र और अन्य ख़ैराती कार्यों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। जरूरतमंदों की पहचान कर पारदर्शी तरीके से सहायता पहुँचाने पर सहमति बनी।
बैठक के अंत में देश में अमन-चैन, आपसी भाईचारे और रमज़ान की बरकतों के लिए विशेष दुआ की गई। उपस्थित उलेमाओं ने समाज के नैतिक और धार्मिक उत्थान के लिए एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प लिया।