जयपुर, 14 फ़रवरी । राजस्थान उच्च न्यायालय ने रींगस-खाटूश्यामजी नई ब्रॉडगेज रेल लाइन परियोजना को लेकर की गई भूमि अवाप्ति का अवार्ड जारी करने पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही अदालत ने परियोजना की डीपीआर का रिकॉर्ड पेश करने के आदेश दिए हैं। जस्टिस अनुरूप सिंघी की एकलपीठ ने यह आदेश गुलाब सहित करीब ढाई दर्जन से अधिक याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिए।
याचिका में अधिवक्ता कार्तिक शर्मा ने अदालत को बताया कि रेल मंत्रालय ने रींगस से खाटूश्यामजी तक प्रस्तावित करीब 18 किमी लंबी रेलवे लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण के लिए 8 अगस्त, 2024 को अधिसूचना जारी की। इसके तहत रींगस और कोटडी सहित अन्य गांवों की करीब 25 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण करना था। याचिका में कहा गया कि रेलवे परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण केवल तकनीकी विशेषज्ञों की ओर से तैयार डीपीआर के अनुसार ही किया जाना था, लेकिन सरकार ने अधिसूचना जारी करते समय डीपीआर से अलग दूसरी जमीन का चयन कर लिया। इसके अलावा उनकी ओर से पेश आपत्तियों को भी रिकॉर्ड पर नहीं लिया। याचिका में कहा गया कि अधिसूचना में कहा गया कि मामले में कोई आपत्ति नहीं मिली, जबकि उनकी ओर से आपत्तियां पेश की गई थी। जिसका विरोध करते हुए केन्द्र सरकार की ओर से एएजी भरत व्यास ने कहा कि परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण पूरी तरह डीपीआर के अनुसार ही किया गया है। याचिकाकर्ताओं की आपत्तियां तकनीकी आधार पर निराधार है। ऐसे में याचिकाओं को खारिज किया जाए। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने मामले में अवार्ड जारी करने पर रोक लगा दी है।