गुरुग्राम, 14 फरवरी । केंद्रीय विद्युत और आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अफोर्डेबल हाउसिंग खासकर आर्थिक रूप से कमजोर तबके और कम आय वाले ग्रुप के लिए चैरिटेबल संस्थान बनाने के प्रस्ताव का समर्थन किया। शनिवार को यहां गुरुग्राम-दिल्ली बॉर्डर स्थित यशोभूमि में आयोजित नेशनल अर्बन एंड रियल एस्टेट डेवलपमेंट कॉन्क्लेव में उन्होंने कहा कि इस सेगमेंट को बैंक और दूसरी संस्थाएं द्वारा मिलने वाले कम फण्ड का बेहतर विकल्प निकाला जा सकता है।
नारेडको द्वारा आयोजित नेशनल अर्बन एंड रियल एस्टेट डेवलपमेंट कॉन्क्लेव 2026 में मनोहर लाल ने यह भी संकेत दिया कि इंडस्ट्री के बड़े और व्यापक सुझावों के अनुसार रेरा से पहले के रुके हुए हाउसिंग प्रोजेक्ट को फाइनेंस करने के लिए एक कमिटेड फंड बनाया जा सकता है, ताकि उनके प्रमोटर और खरीदार दोनों ही विन-विन सेटलमेंट पर पहुंच सकें। मंत्री ने यह भी बताया कि एनसीटी और उसके आस-पास करीब 700-750 झुग्गी बस्तियों को सरकार डेवलप करेगी, जिसके लिए सरकार की अलग-अलग अथॉरिटीज के अंदर अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स के साथ पॉलिसी फ्रेमवर्क पर बहुत हाई लेवल पर बातचीत हो रही है। इस प्रपोजल के शुरू होने से एनसीटी और उसके आस-पास अफोर्डेबल हाउसिंग को जरूरी बढ़ावा मिलेगा। मनोहर लाल ने एलआईजी और ईडब्ल्यूए सेगमेंट में अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए फंड देने के लिए चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन बनाने के मुद्दे पर विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि ऐसे प्रपोज्ड चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन में सीएसआर कंट्रीब्यूशन के जरिए पैसे का इंतजाम किया जा सकता है, ताकि समाज के गरीब तबके के लिए फंड इक_ा किया जा सके। क्योंकि बैंकिंग और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन इस तबके की मदद करने के लिए शायद ही एक्टिव हों।
कॉन्क्लेव में नारेडको ने सुझाव दिया कि रुके हुए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को सपोर्ट करने के लिए स्वामीह फंड का साइज बढ़ाया जा सकता है। मनोहर लाल ने यह भी कहा कि रेरा से पहले मंजूर हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को सपोर्ट करने के लिए एक फंड बनाया जा सकता है, जिसका साइज बातचीत के बाद तय किया जाएगा। इस मामले में यह सुझाव दिया गया कि सरकार रुके हुए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को फिर से शुरू करने के लिए फाइनेंसिंग का इंतजाम करने के लिए एक डेडिकेटेड फंड बनाने पर विचार कर सकती है। नारेडको के प्रेसिडेंट प्रवीण जैन और मंत्री मनोहर लाल ने इस मौके पर केपीएमपी और नारेडको की बनाई एक नॉलेज रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में विकसित भारत के लिए रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक डिटेल्ड रोड मैप बताया गया है।