जोधपुर, 12 फरवरी । नर्सरी व्यवसाय ऐसा व्यवसाय है जो आपको न केवल आर्थिक रूप से मजबूत बना सकता है, अपितु पर्यावरण को सहेजने में भी बेहद कारगर है। आज घरों, खेतों और विभिन्न परियोजनाओं में इनडोर, आउटडोर, मौसमी, फल फूलों सहित औषधिय पौधों की बेहद मांग है एवं बढ़ती मांग के कारण, यह उद्यम नए उद्यमियों के लिए स्थिर आय का जरिया बन रहा है। यह विचार कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. वीएस जैतावत ने व्यक्त किए। कुलगुरु कृषि महाविद्यालय जोधपुर के बागवानी विभाग की ओर से आयोजित पांच दिवसीय नर्सरी प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह के मौके पर प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि इस व्यवसाय में पौधों की बिक्री के अलावा जैविक खाद, गमलें सहित अन्य कृषिपयोगी उपकरणों से भी अतिरिक्त कमाई की जा सकती है। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि हाईटेक नर्सरी हेतु सरकार की ओर से भी विभिन्न योजनाएं व सब्सिडी दी जा रही है, इसलिए प्रशिक्षण से मिले ज्ञान का पूरे मनोयोग से उपयोग करें। कार्यक्रम में मौजूद महाविद्यालय के डीन डॉ. जेआर वर्मा ने कहा कि कम पूंजी निवेश होने के कारण नर्सरी का व्यवसाय युवाओं को काफी आकर्षित कर रहा है। नर्सरी प्रबंधन ऐसा व्यवसाय है, जो पर्यावरण के प्रति लोगों की मानसिकता भी बदल रहा है।
कार्यक्रम में मौजूद निदेशक शिक्षा, प्रो. एसके मूंड ने बताया कि कम पूंजी और कम जगह से शुरुआत आज कई लोग इस व्यवसाय में सफल उद्यमी बने है, साथ ही प्रकृति संरक्षण को लेकर धीरे-धीरे जागरूकता बढ़ रही है ऐसे में भविष्य में भी इस व्यवसाय में अपार संभावनाएं हैं।
प्रतिभागियों को मिले सर्टिफिकेट
इस दौरान प्रशिक्षण कार्यक्रम की निदेशक डॉ. संतोष चौधरी ने प्रशिक्षण के दौरान बताई गई बारीकियां, व्यवहारिक ज्ञान सहित काजरी भ्रमण की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान पौधों की कटिंग, ग्राफ्टिंग, बडिंग, लेयरिंग, मिट्टी व खाद मिश्रण, चूहों सहित कीट प्रबंधन की जानकारी दी गई। प्रतिभागियों की विशेष मांग पर काजरी का भ्रमण करवा कर थार शोभा खेजड़ी की कलम तैयार करना भी सिखाया गया। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट वितरित किए गए। समारोह का संचालन डॉ सीमा ने किया।