काशी के बौद्धिक और आध्यात्मिक वैभव का सजीव प्रमाण है मान मंदिर घाट

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वाराणसी, 12 फरवरी (हि. स.)। वाराणसी के मान मंदिर घाट को लेकर यूपी टूरिज्म डिपार्टमेंट ने प्रचार प्रसार शुरू किया है। वाराणसी में तमाम पर्यटन क्षेत्र में अब मान मंदिर घाट को भी प्राथमिकता देकर उसके प्रचार को पर्यटन विभाग कर रहा है।

इस संबंध में वाराणसी के क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि उत्तर प्रदेश के वाराणसी में आने वाले पर्यटकों के लिए मान मंदिर घाट भी एक पर्यटन का केंद्र है। जिसके संबंध में यूपी टूरिज्म डिपार्टमेंट ने सोशल प्लेटफार्म और प्रमुख स्थानों पर प्रचार प्रसार किया है। मान मंदिर घाट के इतिहास पर नजर डाले तो वाराणसी की पावन नगरी में, गंगा के पवित्र तट पर स्थित मान मंदिर घाट केवल एक घाट नहीं, बल्कि काशी के बौद्धिक और आध्यात्मिक वैभव का सजीव प्रमाण है। इस भव्य घाट का निर्माण आमेर के राजा मान सिंह ने 16 वीं शताब्दी में कराया था। उन्हीं के नाम पर यह घाट मानमंदिर घाट के रूप में प्रसिद्ध हुआ।

उन्होंने बताया कि मान मंदिर घाट की सबसे अनोखी और विशिष्ट पहचान है, इसकी प्राचीन खगोलीय वेधशाला (जंतर-मंतर) जहाँ सदियों पहले सूर्य, चंद्रमा और नक्षत्रों की गति का सूक्ष्म अध्ययन किया जाता था। यह वेधशाला आज भी भारतीय विज्ञान, गणित और वास्तुकला की अद्भुत समझ को दर्शाती है। ऊँची बलुआ पत्थर की सीढ़ियाँ, राजस्थानी स्थापत्य शैली की भव्य इमारतें और सामने निर्मल बहती माँ गंगा, यह समूचा दृश्य मान मंदिर घाट को काशी के सबसे राजसी, ज्ञानमय और विशिष्ट घाटों में स्थान देता है। यहां घूमने आने वाले पर्यटकों को वाराणसी का कुछ अलग अंदाज और अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा।