जोधपुर,10 फरवरी । भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर (आईआईटी जोधपुर) और संत लोंगोवाल इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (एसएलआईईटी), लोंगोवाल के बीच शैक्षणिक सहयोग, अनुसंधान संवर्धन तथा मेधावी विद्यार्थियों के लिए उन्नत शोध अवसर सृजित करने के उद्देश्य से समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।
यह एमओयू लोंगोवाल (पंजाब) में आईआईटी जोधपुर के निदेशक अविनाश कुमार अग्रवाल तथा एसएलआईईटी लोंगोवाल के निदेशक मणि कांत पासवान के बीच संपन्न हुआ।
समझौते के अंतर्गत एसएलआईईटी लोंगोवाल के मेधावी बीटेक विद्यार्थियों को आईआईटी जोधपुर के पीएचडी कार्यक्रमों में प्रत्यक्ष प्रवेश का अवसर प्रदान किया जाएगा। सातवें सेमेस्टर के बाद 8.0 या उससे अधिक सीजीपीए तथा अपनी कक्षा में शीर्ष 10 रैंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को साक्षात्कार के आधार पर, गेट अथवा लिखित परीक्षा के बिना पीएचडी में प्रवेश दिया जा सकेगा।
एमओयू के तहत अर्ली पीएचडी प्रवेश का भी प्रावधान किया गया है, जिसके अंतर्गत योग्य विद्यार्थी पांचवें सेमेस्टर के बाद पीएचडी के लिए आवेदन कर सकेंगे। चयनित विद्यार्थियों को आईआईटी जोधपुर परिसर में शोध, प्रोजेक्ट और इंटर्नशिप के अवसर प्रदान किए जाएंगे, साथ ही छात्रावास सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अतिरिक्त एसएलआईईटी के विद्यार्थी आईआईटी जोधपुर के सूरज (समर अंडरग्रेजुएट रिसर्च एट जोधपुर) कार्यक्रम के अंतर्गत भुगतानयुक्त ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप के लिए भी पात्र होंगे।
यह समझौता दोनों संस्थानों के संकाय सदस्यों के बीच संयुक्त शोध प्रस्ताव, अकादमिक आदान-प्रदान और सहयोग को प्रोत्साहित करेगा, जिससे अनुसंधान और नवाचार को नई दिशा मिलेगी।
इस अवसर पर अविनाश कुमार अग्रवाल ने कहा कि यह एमओयू शोध-आधारित शिक्षा को सुदृढ़ करने और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर पर अवसर प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। वहीं मणि कांत पासवान ने इसे एसएलआईईटी विद्यार्थियों के लिए उच्च स्तरीय शोध और अकादमिक प्रगति का सशक्त माध्यम बताया।
यह समझौता हस्ताक्षर की तिथि से प्रभावी होगा और आपसी सहमति से समाप्त होने तक मान्य रहेगा। यह एमओयू आईआईटी जोधपुर और एसएलआईईटी लोंगोवाल के बीच दीर्घकालिक शैक्षणिक एवं शोध साझेदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।