भागलपुर, 09 फ़रवरी । मजदूर विरोधी 4 लेबर कोड्स के खिलाफ आहूत 12 फरवरी की देशव्यापी हड़ताल को लेकर ऐक्टू का अभियान जारी है। सोमवार को भागलपुर शहर सहित नाथनगर और शाहकुंड प्रखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में ऐक्टू और सम्बद्ध यूनियनों के कार्यकर्ताओं ने मजदूरों के बीच सम्पर्क अभियान चलाया।
वेतन संहिता 2019 वापस लो, चारों लेबर कोड रद्द करो, सम्मानजनक मज़दूरी हक हमारा, इस पर हमला नहीं सहेंगे आदि नारों को बुलंद करते हुए इस दौरान छोटी–छोटी सभा व बैठकें कर सरकार की मजदूर विरोधी कारगुज़ारियों और नीतियों को उजागर किया गया।
बिहार राज्य निर्माण मजदूर यूनियन और असंगठित कामगार महासंघ के कार्यकर्ताओं ने मौके पर व्यापक समर्थन देकर हड़ताल को सफल बनाने की अपील करते हुए पर्चे वितरित किए। अभियान का नेतृत्व ऐक्टू के राज्य सह जिला सचिव मुकेश मुक्त, बिहार राज्य निर्माण मजदूर यूनियन के जिला संयुक्त सचिव राजेश कुमार, असंगठित कामगार महासंघ की स्थानीय संयोजक कविता देवी ने स्थानीय भीखनपुर, इशाकचक और लोदीपुर में मजदूरों को सम्बोधित करते हुए ऐक्टू के राज्य सह जिला सचिव मुकेश मुक्त ने कहा कि वेतन संहिता 2019 के ज़रिये मज़दूरों की मज़दूरी पर सीधा हमला किया जा रहा है। लेबर कोड बिल ‘फ्लोर वेज’ के नाम पर न्यूनतम मज़दूरी को नीचे खींचने और सम्मानजनक, जीवनयापन योग्य मज़दूरी की अवधारणा को खत्म करने की कोशिश है। यह मेहनत की कीमत घटाने और मुनाफ़ा बढ़ाने की खुली नीति है। चारों मज़दूर-विरोधी श्रम कोडों के साथ सरकार मज़दूरी, काम के घंटे और सामाजिक सुरक्षा पर हमला कर रही है। इसका विरोध करें, 12 फरवरी की देशव्यापी हड़ताल में शामिल हों।
संयुक्त जिला सचिव राजेश कुमार ने मजदूरों पर हमले जारी रखे जाने का पुरजोर विरोध करते हुए कहा कि अब 12 से 16 घंटे तक काम करवाने का कानून बना दिया गया है। यूनियन बनाने का अधिकार करीब – करीब खत्म ही कर दिया गया है। दूसरी ओर लेबर कार्यालय भ्रष्टाचार का अड्डा बन हुआ है। कार्यक्रमों में उपरोक्त सहित मीरा देवी, बिंदु भारती, खुशबू देवी, ऊषा देवी, मो. मंसूर, सलमा बेगम, जुगलकुशोर साह, सुमा देवी, पंकज दास, जानकी देवी, गोपाल दास, सीमा देवी, हीरा देवी, पप्पू यादव, सविता देवी, सुरेंद्र महतो, नीलम देवी, किशोरदेव पंडित, दीपक दास, विंदु देवी, पिंकी देवी, रुबी देवी, मो. अफाक, मो. साबिर, ननकी देवी, गुलनिशां खातून, बीबी सोनम, रामदेव सिंह, विनोद तांती, शांति देवी, विनीता देवी, सिकंदर मंडल आदि बड़ी संख्या में महिला – पुरुष मजदूर शामिल हुए।