फर्जी जीएसटी गिरोह का भंडाफोड़, 2 करोड़ 66 लाख की कर चोरी उजागर, दो गिरफ्तार

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कानपुर, 08 फरवरी । जनपद कमिश्नरेट की क्राइम ब्रांच ने एक बड़े फर्जी जीएसटी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। शातिर जाली कागज़ात के सहारे कागज़ी फर्में खड़ी कर जीएसटी पंजीकरण हासिल करता था और बिना किसी वास्तविक लेन-देन के फर्जी टैक्स इनवॉइस व ई-वे बिल तैयार कर इनपुट टैक्स क्रेडिट का गलत लाभ उठाकर सरकारी खजाने को करोड़ों की चपत लगा रहा था। पुलिस ने तकनीकी जांच में मिले इंटरनेट आईपी एड्रेस के आधार पर गिरोह के मास्टरमाइंड सीए समेत उसके एक सहयोगी को दबोच लिया है।

पुलिस उपायुक्त अपराध श्रवण कुमार सिंह ने रविवार को प्रेस वार्ता में बताया कि कानपुर से संचालित एक फर्जी जीएसटी नेटवर्क ने प्रदेश के कई जिलों में सरकारी राजस्व को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया है। गिरोह के खिलाफ उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जनपदों में पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं। इसी कड़ी में राज्य कर विभाग से मिली सूचना पर थाना कल्याणपुर क्षेत्र में अपूर्व ट्रेडिंग कम्पनी के नाम से फर्जी जीएसटी पंजीकरण का मामला सामने आया, जिस पर सम्बंधित थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी।

जांच में सामने आया कि फर्म के घोषित व्यापार स्थल पर न तो कोई वास्तविक कारोबार हो रहा था और न ही सम्बंधित व्यक्ति वहां रहता था। स्थानीय लोगों ने भी किसी व्यावसायिक गतिविधि से इनकार किया, जबकि पंजीकरण से जुड़ा मोबाइल नंबर बंद मिला। पड़ताल में यह स्पष्ट हुआ कि अपूर्व ट्रेडिंग एक कागजी फर्म थी, जिसके जरिए अन्य फर्जी फर्मों को आउटवर्ड सप्लाई दिखाकर फर्जी टैक्स इनवॉइस और ई-वे बिल तैयार किए गए। वर्ष 2019-20 के दौरान इस नेटवर्क के जरिए करीब 2 कराेड़ 54 लाख रुपये टैक्स और 12 लाख 51 हजार रुपये पेनाल्टी, कुल मिलाकर 2 कराेड़ 66 लाख रुपये से अधिक की कर चोरी की गई।

मामले का खुलासा करते हुए पुलिस ने बर्रा के आदर्श नगर निवासी कमल गौरव साहू और रावतपुर निवासी एहतेशाम हुसैन को गिरफ्तार किया है। आरोपित के पास से पैन कार्ड, मोबाइल फोन, जीएसटी रजिस्ट्रेशन दस्तावेज, ई-वे बिल, फर्जी इनवॉइस समेत अहम साक्ष्य बरामद किए गए हैं। दोनों को न्यायालय में पेश कर जेल भेजने की कार्रवाई की जा रही है।