बिजली संशोधन विधेयक के विरोध में बिजली बोर्ड ज्वाइंट एक्शन कमेटी का ऐलान, 12 फरवरी को हड़ताल और प्रदर्शन

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हमीरपुर, 06 फ़रवरी । हिमाचल प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड ज्वाइंट एक्शन कमेटी जिला हमीरपुर की एक महत्वपूर्ण बैठक संयोजक कामेश्वर दत्त शर्मा की अध्यक्षता में हमीरपुर में संपन्न हुई। बैठक में केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित बिजली संशोधन विधेयक, 2025 तथा इसके प्रावधानों को लागू करने के लिए की जा रही स्मार्ट मीटरिंग पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि बिजली क्षेत्र देश की बुनियादी सार्वजनिक सेवा है, जिसका सीधा संबंध हर घर, किसान, छोटे व्यापारी, उद्योग, कर्मचारी और आम नागरिक के जीवन से जुड़ा हुआ है।बैठक में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित बिजली संशोधन विधेयक, 2025 में ऐसे कई प्रावधान शामिल हैं, जिनसे बिजली कंपनियों के निजीकरण का रास्ता साफ होगा। इससे उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और कर्मचारियों व पेंशनरों की सेवाएं एवं सामाजिक सुरक्षा भी प्रभावित होंगी। ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने स्पष्ट किया कि इस विधेयक और इसके तहत लागू की जा रही स्मार्ट मीटरिंग नीति के खिलाफ प्रदेशभर में विरोध तेज किया जाएगा।

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि एनसीसीओईईई के राष्ट्रीय आह्वान पर 12 फरवरी 2026 को समूचे हिमाचल प्रदेश में पेन डाउन, टूल डाउन हड़ताल की जाएगी। इसके साथ ही भोजनावकाश के दौरान बिजली बोर्ड के कार्यालयों के बाहर पेंशनरों और आम जनता के सहयोग से विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने सभी कर्मचारियों, अभियंताओं, पेंशनरों और उपभोक्ताओं से इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया।

ज्वाइंट एक्शन कमेटी इंप्लाइज यूनिटियर पेंशनर्स हमीरपुर जिला के संयोजक कामेश्वर दत्त शर्मा ने कहा कि संसद में बिजली संशोधन विधेयक, 2025 को पेश किए जाने की पूरी संभावना है। इसके विरोध में पूरे देश में 12 फरवरी को प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ऑल इंडिया स्तर से 12 फरवरी 2026 को हड़ताल की कॉल दी गई है, जिसे हिमाचल प्रदेश में भी पूरा समर्थन दिया जाएगा।

वहीं, पेंशनर फोरम के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट कुलदीप सिंह खरवाड़ा ने कहा कि प्रस्तावित बिजली संशोधन विधेयक, 2025 के लागू होने से निजी कंपनियों को वितरण क्षेत्र में प्रवेश का रास्ता आसान हो जाएगा। लाभ कमाने के उद्देश्य से काम करने वाली ये कंपनियां सस्ती और सब्सिडी वाली बिजली देने के बजाय मुनाफे को प्राथमिकता देंगी, जिससे घरेलू, कृषि और छोटे उपभोक्ताओं की बिजली महंगी होगी। उन्होंने स्मार्ट मीटरों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए और कहा कि स्मार्ट मीटर केवल कॉरपोरेट घरानों को लाभ पहुंचाने के लिए लगाए जा रहे हैं। प्रति स्मार्ट मीटर लगाने की लागत हजारों रुपये है, जिसका सीधा बोझ बिजली बोर्ड, कर्मचारियों और उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ज्वाइंट एक्शन कमेटी किसी भी सूरत में बिजली क्षेत्र के निजीकरण और जनविरोधी नीतियों को स्वीकार नहीं करेगी और इसके खिलाफ संघर्ष जारी रहेगा।