बीकानेर/जयपुर, 05 फरवरी । बीकानेर में चल रहे ‘खेजड़ी बचाओ’ आंदोलन के चौथे दिन घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। कौशल, रोजगार एवं उद्यमिता मंत्री केके विश्नोई द्वारा अनशनकारियों को जूस पिलाकर अनशन तुड़वाने के प्रयास के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। जैसे ही केवल बीकानेर और जोधपुर संभाग में खेजड़ी की कटाई पर रोक लगाने का आदेश सामने आया, आंदोलनकारी भड़क उठे और कुछ देर बाद फिर से अनशन पर बैठ गए। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक पूरे राजस्थान में खेजड़ी की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा, तब तक आमरण अनशन जारी रहेगा।
आंदोलन की अगुवाई कर रहे परसराम विश्नोई ने कहा कि अनशन समाप्त नहीं हुआ है। संतों और आंदोलनकारियों की भावना थी कि प्रतिबंध पूरे प्रदेश में लागू होना चाहिए, लेकिन जो आदेश आया वह अधूरा है। उन्होंने कहा कि आमरण अनशन यथावत जारी है और सरकार को दोबारा ठोस पहल करनी होगी।
इससे पहले गुरुवार सुबह करीब 11 बजे मंत्री केके विश्नोई और राज्य जीव-जंतु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष जसवंत बिश्नोई अनशन स्थल बिश्नोई धर्मशाला पहुंचे। मंच से संबोधन के दौरान आंदोलनकारियों ने मंत्री से लिखित आश्वासन की मांग की। संत सरजूदास ने स्पष्ट कहा कि जब तक लिखित में आश्वासन नहीं मिलेगा, तब तक अनशन नहीं तोड़ा जाएगा। मंत्री केके विश्नोई ने सरकार की ओर से लिखित में देने की बात कही और अनशन तोड़ने की अपील की, लेकिन आंदोलनकारी अपने रुख पर अड़े रहे।
फलोदी विधायक पब्बाराम विश्नोई द्वारा अनशन तोड़ने की अपील के दौरान भी विरोध हुआ। उनके एक बयान के बाद माहौल और गरमा गया, जिसके चलते आंदोलनकारियों ने उन्हें मंच पर बैठने को कहा। इसके बाद अनशन फिर से जारी रहने की घोषणा कर दी गई।
उल्लेखनीय है कि बीकानेर में कलेक्ट्रेट के पास पॉलिटेक्निक कॉलेज ग्राउंड में 2 फरवरी से आंदोलन शुरू हुआ था। उसी रात आंदोलनकारी बिश्नोई धर्मशाला पहुंच गए थे, जहां लगातार अनशन चल रहा है। बुधवार देर रात चार अनशनकारियों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्थायी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इधर जयपुर में विधानसभा के भीतर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने खेजड़ी संरक्षण को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि राज्य के कल्पवृक्ष खेजड़ी को बचाने के लिए कानून लाया जाएगा और इसका मसौदा जल्द सदन में प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि अगस्त में पर्यावरण प्रेमी संतों से मुलाकात के बाद ही खेजड़ी संरक्षण कानून की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी।
खेजड़ी बचाओ आंदोलन में केवल बीकानेर और जोधपुर ही नहीं, बल्कि अजमेर, उदयपुर, सीकर सहित प्रदेश के कई जिलों और अन्य राज्यों से भी लोग शामिल हुए हैं।