नई दिल्ली, 03 फरवरी । दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने दिल्ली दंगा-2020 के छह आरोपितों को बरी करते हुए पुलिस की जांच पर सवाल खड़े किए हैं। एडिशनल सेशंस जज प्रवीण सिंह ने कहा कि पुलिस ने फर्जी चार्जशीट दाखिल किया।
कोर्ट ने जिन आरोपितों को बरी करने का आदेश दिया उनमें प्रेम प्रकाश ऊर्फ कालू, इशु गुप्ता, राजकुमार ऊर्फ सेवैया, अमित ऊर्फ अन्नू, सुरेंद्र सिंह और हरि ओम शर्मा शामिल हैं। इन आरोपितों के खिलाफ न्यू उस्मानपुर थान में दंगा करने के मामले में एफआईआर दर्ज किया गया था। कोर्ट ने आरोपितों को बरी करते हुए इस बात पर चिंता जताई कि साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की गई। ऐसा होना इस केस को देख रहे पुलिस अधिकारियों की गंभीर लापरवाही का नतीजा है। कोर्ट ने तत्कालीन एसएचओ और संबंधित एसीपी की लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त को आदेश की प्रति भेजने का आदेश दिया। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि वो जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई करें।
घटना 25 फरवरी, 2020 की है जब दिल्ली पुलिस को फोन पर एक सूचना मिली कि दुकानें तोड़ी जा रही हैं, आग लगाई जा रही है, नारेबाजी कर रहे हैं, डंडे ले रखे हैं। जब पुलिस टीम अजीजिया मस्जिद के पास सुदामापुरी पहुंची तो वहां फोन करने वाला मौजूद नहीं था। घटनास्थल का मुआयना करने पर पुलिस ने पाया कि बड़ी संख्या में ईंट और पत्थर के टुकड़े बिखरे पड़े हैं। 29 फरवरी को शिकायतकर्ताओं महबूब अली, आसिफ अली, मोहम्मद ताहिर और शोएब थाने पहुंचे और घटना के संबंध में शिकायत दर्ज करायी। इन शिकायतकर्ताओं के बाद दूसरे शिकायतकर्ता मोहम्मद रईस और खालिद ने भी दंगों के दौरान हुए नुकसान की शिकायत की।
कोर्ट ने पाया कि जिन गवाहों ने पुलिस के सामने आरोपितों की पहचान करने की बात कही उन्होंने कोर्ट ने आरोपितों को नहीं पहचाना। ऐसा होना पुलिस की जांच और इस मामले की देखरेख करने वाले वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की घोर लापरवाही का नतीजा है। फरवरी, 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोग मारे गए थे और करीब 200 लोग घायल हुए थे।