प्रयागराज, 03 फरवरी । उत्तर मध्य रेलवे ने ’कवच’ इकोसिस्टम के लिए अग्रणी वर्चुअल रियलिटी आधारित लोको पायलट प्रशिक्षण प्रणाली के कार्यान्वयन की घोषणा की है। इस अत्याधुनिक सिम्युलेटर को कानपुर स्थित बहुविषय मंडलीय प्रशिक्षण संस्थान में तैनात किया गया है। यह पहली बार है जब उत्तर मध्य रेलवे ने अपने क्रू को अगली पीढ़ी के संरक्षा प्रोटोकॉल के लिए तैयार करने हेतु इमर्सिव वीआर तकनीक को अपनाया है।
भारतीय रेलवे द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम ’कवच’ के तेजी से विस्तार के साथ ही, लोको पायलटों के लिए उच्च स्तरीय और प्रभावी प्रशिक्षण की आवश्यकता सर्वोपरि हो गई है। यह नया वीआर सिम्युलेटर डिजिटल रूप से एक पूर्ण लोकोमोटिव वातावरण तैयार करता है, जिससे लोको पायलट बुनियादी ढांचे की आवश्यकता के बिना ’कवच’ की जटिलताओं को समझ सकते हैं।
वरिष्ठ जनसम्पर्क अधिकारी अमित मालवीय ने मंगलवार काे बताया कि यह प्रणाली ई70 ब्रेकिंग सिस्टम के लिए कवच के सभी 12 परिचालन मोड को कवर करती है, जिसमें वास्तविक प्रशिक्षण के दौरान कठिन माने जाने वाले उच्च जोखिम वाले परिदृश्य शामिल हैं। जैसे सिग्नल पासिंग एट डेंजर की रोकथाम, ट्रिप मोड और संचार विफलता, एसओएस आपात स्थिति एवं शंट और रिवर्स मोड।
उन्होंने बताया कि ’कवच’ प्रणाली के बढ़ते दायरे के साथ देश भर में लोको पायलटों के प्रमाणीकरण की आवश्यकता के दृष्टिगत, इस वीआर सिस्टम की पोर्टेबिलिटी एक बड़ा सहायक कदम साबित होगी। पारम्परिक भारी सिम्युलेटरों के विपरीत, इस सेटअप को न्यूनतम बुनियादी संरचना के साथ दूर-दराज के प्रशिक्षण केंद्रों और स्थानीय डीजल शेडों में बहुत आसानी से कम समय में तैनात किया जा सकता है। यह वीआर पहल परम्परागत प्रशिक्षण की तुलना में अत्यंत लाभकारी है। इसके प्रमुख लाभ हैं;
– रिटेंशन में 40 प्रतिशत का सुधारः अध्ययन बताते हैं कि इमर्सिव वीआर वातावरण पारम्परिक क्लासरूम विधियों की तुलना में जानकारी को याद रखने की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करता है।
– मसल मेमोरी और त्वरित निर्णयः इंटरएक्टिव डीएमआई (ड्राइवर मशीन इंटरफेस) प्रक्रियाएं पायलटों को तब तक अभ्यास करने की अनुमति देती हैं जब तक कि संकट के समय सही प्रतिक्रिया देना उनकी आदत न बन जाए।
– समान प्रशिक्षण गुणवत्ताः यह प्रणाली सभी रेलवे जोन में प्रशिक्षण के अनुभव को एक समान बनाती है।
– संरक्षा युक्त वातावरण में फीडबैकः पायलट नियंत्रित वातावरण में सिस्टम ट्रिप और खराबी का अनुभव कर सकते हैं, जिससे उन्हें तुरंत प्रदर्शन विश्लेषण और सुधार का मौका मिलता है।
पीआरओ के मुताबिक उत्तर मध्य रेलवे के महाप्रबंधक नरेश पाल सिंह ने कहा कि, “उत्तर मध्य रेलवे देश के सबसे व्यस्त रेल गलियारों में से एक पर परिचालन करते हुए नवीन तकनीकी अपनाने और परिचालन दक्षता में हमेशा अग्रणी रहा है। संरक्षा हमारी प्राथमिकता है और कानपुर में यह वीआर एकीकरण एक तकनीक-सशक्त कार्यबल की हमारी व्यापक दृष्टि की ओर पहला कदम है।“ प्रशिक्षण वर्कफ्लो में निर्देशित शिक्षण मॉड्यूल, लाइव कवच प्रतिक्रिया के साथ व्यावहारिक ड्राइविंग परिदृश्य और प्रत्येक पायलट के लिए कठोर स्वचालित मूल्यांकन शामिल है। यह सुनिश्चित करता है कि हमारे लोको पायलट आधुनिक रेल संचालन की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार हैं।