बलोच लिबरेशन आर्मी ने नुश्की शहर से सेना को खदेड़ा, मजीद ब्रिगेड के फिदायीन दंपति की मौत

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क्वेटा (बलोचिस्तान) पाकिस्तान, 03 फरवरी । पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलोचिस्तान में सेना को विद्रोहियों से कड़ा मुकाबला करना पड़ रहा है। बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने दावा किया है कि नुश्की शहर से सेना को खदेड़ दिया है। शहर में अभी भी उसका नियंत्रण है। साथ ही पिछले दिनों के घमासान में बीएलए के मजीद ब्रिगेड के फिदायीन दंपति की मौत हो गई। इस बीच पाकिस्तान के रक्षामंत्री ने कहा कि बीएलए से सरकार कोई बातचीत नहीं करेगी।

द बलोचिस्तान पोस्ट की मंगलवार को प्रसारित रिपोर्ट के अनुसार, नुश्की अभी भी बीएलए के नियंत्रण में है। जमीनी संचार सेवाएं बाधित हैं। लड़ाई में दर्जनों लोग मारे गए हैं। पाकिस्तान की सेना के हवाई हमलों के बावजूद बलोच लड़ाके नुश्की शहर पर अपना नियंत्रण बनाए हुए हैं। खारान के पास बलोच लिबरेशन आर्मी के लड़ाकों ने पाकिस्तान की सेना के दो जमीनी हमलों को विफल कर दिया। इसके बाद सेना को पीछे हटना पड़ा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सेना ने दूसरे और तीसरे दिन दर्जनों ड्रोन हमले किए। बावजूद इसके सेना अभी तक नुश्की शहर पर दोबारा नियंत्रण हासिल करने में सक्षम नहीं हो पाई है। बलोच लिबरेशन आर्मी ने शनिवार सुबह अन्य शहरों की तरह समन्वित अभियानों के माध्यम से नुश्की पर भी नियंत्रण कर लिया। इसके बाद सशस्त्र लड़ाको ने सरकारी इमारतों और पुलिस स्टेशनों के साथ-साथ पाकिस्तान के आईएसआई मुख्यालय और सेना के कई शिविरों पर हमला किया।

पिछले तीन दिन से आईएसआई मुख्यालय में तैनात कई अधिकारी और कर्मचारी बीएलए के हमलों का शिकार हुए हैं। तीन दिन बीत जाने के बावजूद सेना अपने कर्मियों को बचाने और उन्हें सहायता प्रदान करने में विफल रही है। नुश्की शहर में नाकाबंदी के कारण अन्य शहरों के निवासी अपने रिश्तेदारों को लेकर चिंतित हैं। कैडेट कॉलेज में दर्जनों छात्र फंसे हुए हैं।

इस बीच बीएलए के आधिकारिक चैनल हकाल पर मजीद ब्रिगेड में शामिल पति -पत्नी का फोटो और विवरण प्रसारित किया गया है। इस दंपति ने पाकिस्तान की सेना के शिविर पर हमले के दौरान जान गंवा दी। यास्मा बलूच उर्फ ​​जरीना और वसीम बलोच उर्फ ​​जरबर (पति-पत्नी) जमरान के रहने वाले थे। यास्मा बलोच का जन्म 14 फरवरी, 1997 को अल-अंदुर बुलाइदा में हुआ था और वह 2022 में मजीद ब्रिगेड में शामिल हुई थी। वसीम बलोच का जन्म 27 अप्रैल, 1992 को कलहादर ज़मरान में हुआ था। वह 2014 में बीएलए में शामिल हुए और 2022 में मस्जिद ब्रिगेड का हिस्सा बने।

इस लड़ाई पर रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोमवार को कहा कि बलोचिस्तान में महिलाओं और बच्चों पर हमला करने वालों से कोई बातचीत नहीं होगी। आसिफ ने नेशनल असेंबली में कहा कि पंजाब में भी बड़ी संख्या में बलोच रहते हैं। बलोचिस्तान में मेडिकल कॉलेजों सहित बड़ी संख्या में शैक्षणिक और प्रशिक्षण संस्थान हैं। बलोचिस्तान में तेल सहित विभिन्न सामानों की रोजाना तस्करी हो रही है। विद्रोही तेल की तस्करी से रोजाना चार अरब रुपये कमा रहे हैं। ईरान से 40 रुपये प्रति लीटर में तेल खरीदकर उसे कराची में 200 रुपये प्रति लीटर में बेच रहे हैं।

आसिफ ने कहा कि विद्रोही अमेरिकी हथियार इस्तेमाल कर रहे हैं। विद्रोहियों और उनके मददगारों से सख्ती से निपटा जाएगा। उन्होंने सभी दलों से अपने मतभेद भुलाकर सुरक्षा बलों के साथ खड़े होने का आग्रह किया और इस एक मुद्दे पर एकता की अपील की।