जयपुर, 30 जनवरी । राजस्थान में महिला सशक्तीकरण की तस्वीर अब तेजी से बदल रही है। गांव की महिलाएं अब केवल गृहिणी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर उद्यमी बनकर अपनी पहचान बना रही हैं। ग्रामीण विकास मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल ने विधानसभा में बताया कि ‘लखपति दीदी’ योजना महिलाओं को आर्थिक मजबूती देने की दिशा में एक सशक्त कदम है, जिसके जरिए स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं सालाना एक लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं।
प्रश्नकाल के दौरान विधायक शोभा चौहान के सवाल का जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि यह योजना महिलाओं को वित्तीय साक्षरता, ऋण सुविधा, कौशल विकास और उद्यमशीलता के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाती है। इसका उद्देश्य महिलाओं को रोजगार का साधन देना ही नहीं, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास के साथ आर्थिक निर्णय लेने में सक्षम बनाना है।
डॉ. किरोड़ी लाल ने बताया कि सोजत विधानसभा क्षेत्र में राजीविका के तहत 1,392 स्वयं सहायता समूह गठित किए गए हैं, जिनसे 20,621 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इनमें से 278 स्वयं सहायता समूहों की 2,768 महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत कड़ी बनकर उभर रही हैं। इनका विस्तृत विवरण सदन के पटल पर रखा गया।
उन्होंने साफ किया कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने या ‘लखपति दीदी’ बनने के लिए किसी प्रकार का अलग से आवेदन नहीं करना होता। योजना का लाभ स्वाभाविक रूप से महिलाओं की मेहनत, सहभागिता और कार्यक्षमता के आधार पर मिलता है।
ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा कि यह योजना न केवल महिलाओं की आमदनी बढ़ा रही है, बल्कि ग्रामीण परिवारों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में भी सकारात्मक बदलाव ला रही है—जहां महिलाएं अब विकास की धुरी बनकर सामने आ रही हैं।