सोलर रिसर्च के लिए एचपीयू और एसजेवीएन के बीच हुआ एमओयू

Share

शिमला, 30 जनवरी । हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी (एचपीयू) और सार्वजनिक उपक्रम एसजेवीएन लिमिटेड के बीच रिन्यूएबल एनर्जी रिसर्च को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इसके तहत एसजेवीएन, एचपीयू को सोलर एनर्जी सिस्टम में एडवांस्ड रिसर्च के लिए 4.15 करोड़ रुपये की फंडिंग देगा। यह राशि किसी भी राज्य विश्वविद्यालय को एसजेवीएन की ओर से अब तक दी गई सबसे बड़ी रिसर्च सहायता मानी जा रही है।

यह एमओयू एचपीयू के सेंटर फॉर ग्रीन एनर्जी एंड नैनोटेक्नोलॉजी के लिए किया गया है। इसका मकसद सोलर फोटोवोल्टिक सिस्टम की कार्यक्षमता, विश्वसनीयता और उम्र बढ़ाने के लिए वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देना है। इस रिसर्च में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग की मदद से प्रेडिक्टिव डायग्नोस्टिक्स पर काम किया जाएगा जिससे सोलर सिस्टम में आने वाली तकनीकी दिक्कतों का पहले से आकलन किया जा सके।

हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर महावीर सिंह ने कहा कि यह समझौता विश्वविद्यालय की रिसर्च यात्रा में एक बड़ा मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि एसजेवीएन जैसे बड़े सार्वजनिक उपक्रम के साथ यह साझेदारी यह दिखाती है कि एचपीयू अब एप्लीकेशन आधारित और राष्ट्रीय जरूरतों से जुड़ी रिसर्च का एक मजबूत केंद्र बन रहा है। कुलपति ने कहा कि इस सहयोग से यूनिवर्सिटी में रिसर्च का माहौल और मजबूत होगा और इंडस्ट्री तथा एकेडेमिया के बीच बेहतर तालमेल बनेगा।

प्रोफेसर महावीर सिंह ने बताया कि इस तरह की साझेदारियां शोध को प्रयोगशालाओं से निकालकर व्यवहारिक तकनीक में बदलने में मदद करती हैं। उन्होंने कहा कि रिन्यूएबल और सस्टेनेबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में किया गया यह शोध भारत के स्वच्छ ऊर्जा मिशन, ऊर्जा सुरक्षा और दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों में योगदान देगा। उन्होंने इस सहयोग के लिए एसजेवीएन के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर भूपेंद्र गुप्ता और निदेशक (कार्मिक) अजय कुमार शर्मा का आभार जताया।

एसजेवीएन लिमिटेड के निदेशक (कार्मिक) अजय कुमार शर्मा ने कहा कि यह पहली बार है जब एसजेवीएन ने किसी राज्य विश्वविद्यालय को इतनी बड़ी रिसर्च फंडिंग दी है। उन्होंने कहा कि यह एचपीयू की शैक्षणिक क्षमता, रिसर्च विजन और नेतृत्व पर संगठन के भरोसे को दर्शाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस परियोजना के तहत ठोस और उपयोगी नतीजे सामने आएंगे और भविष्य में रिसर्च फंडिंग को और बढ़ाया जा सकता है।

इस रिसर्च प्रोजेक्ट में एग्रो-फोटोवोल्टिक सिस्टम और फ्लोटिंग सोलर पीवी जैसी नई तकनीकों पर भी खास ध्यान दिया जाएगा ताकि बदलते जलवायु हालात में टिकाऊ ऊर्जा समाधान विकसित किए जा सकें। यह परियोजना एचपीयू के सेंटर फॉर ग्रीन एनर्जी एंड नैनोटेक्नोलॉजी में पूरी की जाएगी।

इस परियोजना के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. मनीष कुमार होंगे, जबकि डॉ. रमेश ठाकुर और डॉ. संदीप चौहान को-प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर की भूमिका निभाएंगे। कुलपति प्रोफेसर महावीर सिंह इस प्रोजेक्ट के मेंटर के रूप में मार्गदर्शन देंगे।