बलरामपुर : सुरक्षा घेरे में घंटों चली सुनवाई, विधायक जाति प्रमाणपत्र मामले में 19 फरवरी अगली तारीख

Share

बलरामपुर, 29 जनवरी । प्रतापपुर से भाजपा विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के कथित फर्जी जाति प्रमाणपत्र प्रकरण में गुरुवार को जिला स्तरीय सत्यापन समिति के समक्ष लंबी और अहम सुनवाई हुई। सुबह से शुरू हुई सुनवाई करीब 5 घंटे 30 मिनट तक चली, जिसमें दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने अपने-अपने तर्क विस्तार से प्रस्तुत किए। सुनवाई के बाद समिति ने मामले में अगली तारीख 19 फरवरी 2026 निर्धारित की है।

प्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में सुबह से ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। कलेक्ट्रेट परिसर में बैरीगेटिंग कर आम नागरिकों की आवाजाही पर रोक लगाई गई थी। केवल अधिकृत अधिकारियों, पक्षकारों और अधिवक्ताओं को ही भीतर प्रवेश की अनुमति दी गई।

सर्व आदिवासी समाज की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता जेपी श्रीवास्तव ने बताया कि सत्यापन समिति ने गुरुवार को दोनों पक्षों को विस्तार से सुना है। उन्होंने कहा कि समिति को नियमों के अनुसार 30 दिनों के भीतर अंतिम निर्णय देना चाहिए और मामले को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जाति प्रमाणपत्र माता-पिता के आधार पर तैयार किया जाता है, न कि पति के नाम पर। इस प्रकरण में विधायक का जाति प्रमाणपत्र पति के नाम से तैयार किया गया है, जो प्रथम दृष्टया नियमों के विपरीत है। उनके अनुसार, यदि इस आधार को स्वीकार किया गया तो अंतरजातीय विवाह की स्थिति में कोई भी व्यक्ति अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में आ सकता है।

वहीं विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता उदय प्रकाश सिन्हा ने बताया कि धन सिंह धुर्वे और जय सिंह कुसाम द्वारा विधायक के जाति प्रमाणपत्र को फर्जी बताते हुए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की गई थी। याचिका में छानबीन समिति द्वारा विलंब किए जाने का आरोप लगाया गया था, जिस पर न्यायालय ने यथाशीघ्र निराकरण के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में इस प्रकरण में कानूनी बाध्यता उत्पन्न हो गई है, जिसको लेकर समिति के समक्ष आपत्ति दर्ज की गई है।

अधिवक्ता सिन्हा ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 329 का हवाला देते हुए कहा कि किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि के निर्वाचन को केवल इलेक्शन पिटिशन के माध्यम से ही चुनौती दी जा सकती है, न कि रिट याचिका के जरिए। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों और दिशा-निर्देशों का उल्लेख करते हुए समिति से आग्रह किया कि आपत्ति को स्वीकार करते हुए विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के जाति सत्यापन की कार्यवाही इसी स्तर पर समाप्त की जाए।

लंबी सुनवाई के बाद समिति ने मामले की अगली तारीख 19 फरवरी 2026 तय की है। लगातार टलती सुनवाई के चलते यह मामला जिले में चर्चा और संवेदनशीलता का विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें अगली तारीख पर टिकी हैं, जहां मामले की आगे की दिशा तय होगी।