युवाओं को जागरूक और उत्तरदायी नागरिक बनाना अभाविप का संकल्प: घनश्याम शाही

Share

गोरखपुर, 28 जनवरी । अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, गोरक्ष प्रांत की गोरखपुर महानगर इकाई द्वारा बुधवार को ‘स्वयं सिद्ध 2026’ के समापन समारोह का आयोजन योगीराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास रहे, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के क्षेत्रीय संगठन मंत्री घनश्याम शाही उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में सहजनवा विधायक प्रदीप शुक्ल, अध्यक्षता डॉ. सत्या पांडेय, हॉकी संघ के अध्यक्ष मनीष सिंह, स्वागत समिति के अध्यक्ष राजेश पांडेय, स्वागत समिति के मंत्री सार्थक अग्रवाल, कार्यक्रम संयोजक हर्षित मालवीय एवं अभाविप महानगर अध्यक्ष डॉ. विवेक शाही उपस्थित रहे।

प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, गोरखपुर महानगर के कार्यकर्ताओं द्वारा “स्वयं सिद्ध” कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य छात्राओं एवं युवाओं में आत्मनिर्भरता, रचनात्मकता, नेतृत्व क्षमता तथा आत्मविश्वास का विकास करना है, ताकि वे समाज में अपनी प्रतिभा और कौशल के माध्यम से एक सशक्त पहचान बना सकें। इस कार्यक्रम के अंतर्गत मेंहदी प्रतियोगिता, चित्रकला, रंगोली, निबंध लेखन, सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता तथा विभिन्न प्रकार के खेलकूद जैसी विविध, ज्ञानवर्धक एवं सांस्कृतिक गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिनके माध्यम से प्रतिभागियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिला और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के साथ उनके सर्वांगीण विकास को प्रोत्साहन प्रदान किया गया।

अभाविप के क्षेत्रीय संगठन मंत्री घनश्याम शाही ने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों का सम्मान कर सीमित नहीं रहती, बल्कि विद्यार्थियों में चरित्र निर्माण, राष्ट्रभक्ति और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना को भी जागृत करती है। परिषद का उद्देश्य विद्यार्थियों को सक्रिय, जागरूक और उत्तरदायी नागरिक बनाना है, जो आगे चलकर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें। शिक्षा को केवल अंकों तक सीमित न रखते हुए विद्यार्थी परिषद समय-समय पर रचनात्मक, सांस्कृतिक, सामाजिक एवं वैचारिक कार्यक्रमों का आयोजन करती है, जिससे युवा पीढ़ी अपने भीतर छिपे नेतृत्व कौशल, सामाजिक चेतना और राष्ट्र के प्रति समर्पण को पहचान सके। विद्यार्थी परिषद केवल “भारत माता की जय” का नारा लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन युवाओं को आगे लाने का कार्य करती है, जो अपने आचरण, कर्म और समर्पण से इस भाव को चरितार्थ करते हैं।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महंत राजू दास ने कहा कि भारत की पुरातन संस्कृति इस बात का जीवंत प्रमाण है कि इस देश में ज्ञान, विवेक और बौद्धिक परंपरा की कभी कमी नहीं रही। चाहे वह स्वामी विवेकानंद जैसे महान विचारक हों या आज के नवयुवक, सभी भारत के उज्ज्वल भविष्य के प्रतीक हैं। भारतीय संस्कृति में शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक अच्छे मनुष्य, चरित्रवान नागरिक और राष्ट्रनायक का निर्माण रहा है। यही कारण है कि तक्षशिला, नालंदा और गुरुकुलों की परंपरा ने दुनिया को ज्ञान, संतुलन और विवेक का संदेश दिया।

स्वागत समिति के अध्यक्ष राजेश पांडे ने अपने संबोधन में कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा आयोजित “स्वयं सिद्ध” जैसे कार्यक्रम आज के युवाओं के लिए एक सशक्त मंच प्रदान करते हैं, जहाँ प्रतिभा, संस्कार और नेतृत्व का समन्वय देखने को मिलता है। “स्वयं सिद्ध 2026” जैसे आयोजन युवाओं को अपनी क्षमताओं को पहचानने, समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझने और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। इस अवसर पर महानगर के 1000 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। कार्यक्रम में मंच संचालन प्रशांत त्रिपाठी ने किया तथा आभार ज्ञापन डॉ. विवेक शाही द्वारा प्रस्तुत किया गया।